80 वर्ष की आयु में सेवा का संकल्प: हर सुबह मोतीझील में नि:स्वार्थ ‘दातून’ बांटते हैं लक्ष्मण दास

समाजसेवी अनिल धूपर और पवन सहजातपुरी ने किया सम्मानित, स्वास्थ्य के प्रति जगा रहे अलख

कानपुर। कहते हैं उम्र केवल एक संख्या है, अगर मन में सेवा का जज़्बा हो तो इंसान हर दिन समाज के लिए नई प्रेरणा बन सकता है। इस कथन को साकार कर रहे हैं कौशलपुरी निवासी 80 वर्षीय समाजसेवी लक्ष्मण दास लालवानी। पेशे से ईंट-भट्ठा स्वामी होने के बावजूद, वे पिछले लंबे समय से शहर के मोतीझील उद्यान में मॉर्निंग वॉक पर आने वाले नागरिकों को प्रतिदिन नि:शुल्क नीम की दातून वितरित कर रहे हैं।

हर सुबह जब अधिकांश लोग अपने दैनिक कार्यों की तैयारी में जुटते हैं, उस समय लक्ष्मण दास लालवानी मोतीझील पहुंच जाते हैं। वहां टहलने आने वाले सैकड़ों लोगों को वे प्रेमपूर्वक नीम की दातून भेंट करते हैं। उनका मानना है कि नीम की दातून न केवल दांतों और मसूड़ों के लिए लाभकारी है, बल्कि यह हमारी प्राचीन भारतीय जीवनशैली और आयुर्वेदिक परंपराओं का भी अभिन्न हिस्सा है।

उनका यह कार्य देखने में भले ही छोटा लगे, लेकिन इसके पीछे स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने का बड़ा संदेश छिपा है। नियमित रूप से दातून का उपयोग करने से दांत मजबूत रहते हैं, संक्रमण से बचाव होता है और रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता कम होती है—इस बात को वे अपने व्यवहार से लोगों तक पहुंचा रहे हैं।

उनके इस नि:स्वार्थ सेवा कार्य को देखते हुए समाजसेवी अनिल कुमार धूपर द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर रोटेरियन पवन सहजातपुरी (असिस्टेंट गवर्नर) भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सम्मान समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में भी निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करना और दूसरों के स्वास्थ्य की चिंता करना अत्यंत सराहनीय है।

अनिल धूपर ने अपने संबोधन में कहा कि लक्ष्मण दास लालवानी का यह प्रयास केवल दातून बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सेवा, सद्भावना और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने का कार्य है। वहीं पवन सहजातपुरी ने कहा कि ऐसे लोग समाज की वास्तविक पूंजी होते हैं, जो बिना किसी अपेक्षा के जनकल्याण में लगे रहते हैं।
स्वयं लक्ष्मण दास लालवानी का कहना है कि प्रकृति से जुड़कर ही मनुष्य सच्चे अर्थों में स्वस्थ रह सकता है और मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। उनके इस विचार और कार्य से प्रेरित होकर मोतीझील आने वाले अनेक नागरिकों ने उनके प्रति आभार व्यक्त किया और उनके दीर्घायु एवं स्वस्थ जीवन की कामना की।
निस्संदेह, लक्ष्मण दास लालवानी जैसे लोग आज के समाज में एक जीवंत उदाहरण हैं, जो यह सिखाते हैं कि सेवा और संकल्प के लिए न उम्र की सीमा होती है, न किसी स्वार्थ की आवश्यकता।

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