कानपुर। “आग तो आग है, दोस्त या दुश्मन फैसला हमें करना है”—इसी संदेश के साथ जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, कानपुर नगर एवं रेड क्रॉस सोसाइटी, कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में चोबेपुर स्थित लोहिया एयरोस्पेस सिस्टम में सुरक्षित अग्नि सुरक्षा एवं प्राथमिक उपचार का व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण मुख्य प्रशिक्षक आपदा प्रबंधन एवं रेड क्रॉस के मास्टर ट्रेनर लखन कुमार शुक्ला द्वारा प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राजीव सेठ द्वारा किया गया। इसके उपरांत अग्नि सुरक्षा मॉक ड्रिल का आयोजन मुख्य प्रशिक्षक लखन कुमार शुक्ला के निर्देशन में किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान एबीसी टाइप अग्निशामक यंत्रों का प्रयोग कर आग को फैलने से रोकने का अभ्यास कराया गया। इसके बाद फोम मॉनिटर एवं एफएमबी के माध्यम से फोम चलाकर आग पर नियंत्रण का प्रदर्शन किया गया। आसपास के प्लांटों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाटर मॉनिटर एवं हाइड्रेंट सिस्टम से पानी की दीवार बनाकर हीट ट्रांसफर को रोका गया।
ड्रिल के दौरान एक घायल को प्राथमिक उपचार प्रदान कर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया भी दिखाई गई। लखन कुमार शुक्ला ने बताया कि यह ड्रिल काल्पनिक ऑयल/केमिकल फायर को ध्यान में रखकर वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप की गई, जिसमें कंपनी की फायर सेफ्टी टीम, रेस्क्यू टीम, प्राथमिक उपचार टीम एवं साइट सेफ्टी टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाते हुए सराहनीय प्रदर्शन किया। मुख्य प्रशिक्षक ने बताया कि सुरक्षा उपकरणों का नियमित रूप से मॉक ड्रिल के माध्यम से अभ्यास किया जाना आवश्यक है, जिससे उपकरणों की क्रियाशीलता एवं आपात स्थिति में उनकी उपयोगिता का सही आकलन हो सके। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना या दुर्घटना के तीन प्रमुख कारण होते हैं—लापरवाही, अज्ञानता और जल्दबाजी। यदि इन तीनों से बचा जाए तो अधिकांश दुर्घटनाओं को रोका जा सकता है।आग के संबंध में जानकारी देते हुए लखन शुक्ला ने बताया कि आग तभी लगती है जब ऑक्सीजन, ईंधन और उचित ताप—ये तीनों तत्व एक साथ मौजूद हों। यदि इन तीनों में से किसी एक को कम या समाप्त कर दिया जाए, तो आग पर प्रभावी रूप से काबू पाया जा सकता है। प्रशिक्षण के दौरान प्राथमिक उपचार पर भी विशेष जोर दिया गया। सीपीआर के माध्यम से कृत्रिम श्वास देकर मरीज के जीवन को बचाने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। उन्होंने बताया कि दुर्घटनाओं में घायलों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण समय पर फर्स्ट एड न मिल पाना है। यदि घायल को “गोल्डन आवर” में सही सहायता मिल जाए, तो उसकी जान बचाई जा सकती है। इस दौरान रक्तस्राव रोकने के लिए तिकोनी पट्टी के प्रयोग की विधि भी सिखाई गई।कार्यक्रम के अंत में प्रशिक्षक ने दोहराया कि जागरूकता, सतर्कता और सही प्रशिक्षण ही आपदाओं से बचाव का सबसे मजबूत माध्यम है। इस अवसर पर प्लांट के अधिकारी, कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी, अग्निशमन टीम सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।