कानपुर- देश और प्रदेश में मकर संक्रांति का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस वर्ष 14 जनवरी को संक्रांति तिथि मनाई गई, हालांकि ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह तिथि 15 जनवरी को पड़ रही है, जिसके आधार पर राज्य सरकार ने भी सार्वजनिक अवकाश की तारीख में संशोधन किया। इसके बावजूद श्रद्धालुओं ने बुधवार को अपने परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगाई।
सुबह-सुबह ही सरसैया घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ गई। तड़के से ही लोग गंगा स्नान के लिए घाट पहुंचे और सूर्य देव को अर्घ्य देकर अपनी श्रद्धा प्रकट की। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए। घाटों पर भारी पुलिस बल तैनात रहा और नगर निगम की टीम ने सफाई और स्वच्छता बनाए रखने में विशेष ध्यान दिया।
मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा स्नान से मनुष्य के पाप धुल जाते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है। लोग इस अवसर पर सूर्य देव की उपासना करते हैं और परिजनों तथा जरूरतमंदों को खिचड़ी, अन्न और वस्त्र दान करते हैं। कई क्षेत्रों में यह पर्व ‘खिचड़ी पर्व’ के रूप में भी मनाया जाता है।
इस अवसर पर घाटों पर श्रद्धालुओं ने न केवल गंगा स्नान किया बल्कि खिचड़ी और अन्य दान के माध्यम से समाज में सहयोग और समरसता का संदेश भी दिया। प्रशासन ने घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भीड़ नियंत्रण और मार्ग संकेतों का विशेष ध्यान रखा। साथ ही, घाटों पर पानी की व्यवस्था, प्राथमिक स्वास्थ्य सहायता और आपातकालीन सेवाओं की भी व्यवस्था की गई थी।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों की सराहना की। उनका कहना था कि इस प्रकार के इंतजामों से पर्व की भव्यता और आस्था दोनों सुरक्षित रहते हैं। इस दिन घाटों और आसपास के क्षेत्रों में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना, दान और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिला।
इस प्रकार मकर संक्रांति के पर्व ने न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से लोगों को जोड़ने का काम किया बल्कि समाज में आपसी सहयोग और सेवा भाव को भी बढ़ावा दिया।
मकर संक्रांति पर घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़