देश की शान रही जेके जूट मिल अब इतिहास बनी, आज मिल की परिसंपत्तियां होगी नीलाम

आईआरपी ने मिल की बिक्री का तैयार किया खाका

कानपुर-जेके जूट मिल इतिहास का हिस्सा हो जाएगी जूट मिल बिकने जा रही है जिसके लिए छह कंपनियां मिल की बोली लगाएंगी सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी जूट मिल की परिसंपत्तियों की मालिक बनेगी सात दिसंबर 1931 को बनी जेके जूट मिल की शान देश-भर में थी 31 जून 2003 को कंपनी लड़खड़ाई तो मजदूरों का बकाया होने लगा। 2007 में सारडा ग्रुप ने मिल को खरीद लिया था आठ मार्च 2014 से मिल पूरी तरह बंद हो गई। इससे पहले 2008 से 2014 के बीच मिल को 12 बार बंद किया गया कंपनी ने उत्पादन बंद कर दिया इसके बाद कर्मचारियों की नौकरी पर संकट मंडराने लगा जेके जूट मजदूर मोर्चा ने कर्मचारियों को बकाया वेतन का भुगतान करने की लड़ाई को कोर्ट में लड़ा राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) ने मजदूरों के बकाया भुगतान के लिए अंतरिम समाधान पेशेवर दीपक कुमार अग्रवाल को नियुक्त किया आईआरपी दीपक अग्रवाल मजदूरों के बकाया भुगतान के लिए मिल की परसंपत्तियों का अधिग्रहण बीते साल करने पहुंचे थे, तब प्रबंधन ने उन्हें परिसर में प्रवेश करने में अड़ंगा डाला था हालांकि मिल प्रबंधन को बैकफुट पर जाना पड़ा फिलहाल, आईआरपी ने कालपी रोड स्थित 10.5 एकड़ के मिल परिसर और उपकरण, जरीब चौकी स्थित 2700 वर्ग मीटर में बने मिल के सात बंगले और बिहार में जूट की खेती के लिए कटिहार, पूर्णिया, अररिया, गुलाबबाग और पारिसिसगंज स्थित करीब 15 एकड़ जमीन की बिक्री का खाका तैयार किया है जेके जूट मिल की परिसंपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 650 करोड़ बताई जा रही है इसकी खरीद के लिए सारंडा ग्रुप के एक भाई ने विजन कॉम्पटेक इंटीग्रेटर लिमिटेड फर्म के नाम से भी टेंडर डाला है साथ ही सिंहानिया ग्रुप की यदु इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड ने भी टेंडर डाला है पहले जेके जूट मिल सिंहानिया ग्रुप की ही हुआ करती थी इसके अलावा प्लेटिना रियल एस्टेट लिमिटेड, ओडिसा मेटलिंक प्राइवेट लिमिटेड, शाइन स्टार बिल्ड कैप प्राइवेट लिमिटेड और रोहित कुमार देवरा-आरके देवरा ग्रुप फर्म खरीद की बोली लगाएंगी जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा के महामंत्री राजू प्रसाद ने बताया कि जेके जूट मिल की बिक्री के लिए छह कंपनियों ने टेंडर डाला है 12 को टेंडर खुलेगा, सबसे अधिक बोली लगाने वाली कंपनी जेके जूट मिल की करीब 650 करोड़ की परसंपत्तियों की खरीदार बनेगी। बिक्री से मिलने वाली रकम से मजदूरों का वेतन, ग्रेच्युटी, बोनस के अलावा पीएफ, ईएसआई, बिजली, पानी, सीवर और जीएसटी का 275 करोड़ का भुगतान आईआरपी दीपक अग्रवाल करेंगे।

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