साइबर अपराधों से बचाव, शिक्षा, अनुशासन और पुलिस–जन मित्रता पर दिया संदेश
कानपुर।
कानपुर के कोतवाली परिसर में पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें शहर के विभिन्न स्कूलों के लगभग 100 स्कूली बच्चों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन से पुलिस के प्रति भय को समाप्त कर उनके भीतर विश्वास, सहयोग और मित्रता की भावना विकसित करना रहा।
इस अवसर पर बीएनएसडी बालिका इंटर कॉलेज, क्राइस्ट चर्च कॉलेज और जीएनके स्कूल के छात्र–छात्राओं ने कोतवाली थाने का भ्रमण कर पुलिस की कार्यप्रणाली को नज़दीक से समझा। बच्चों को थाने के विभिन्न महत्वपूर्ण हिस्सों जैसे जनरल डायरी (जीडी) कार्यालय, मालखाना, हवालात, साइबर हेल्पडेस्क और मिशन शक्ति केंद्र का निरीक्षण कराया गया, जिससे उन्हें पुलिस की रोजमर्रा की जिम्मेदारियों की व्यावहारिक जानकारी मिली।
सहायक पुलिस आयुक्त, कोतवाली ने बच्चों को सरल भाषा में बताया कि एफआईआर क्या होती है, इसे कैसे दर्ज कराया जाता है, तथा आरोपी और अपराधी के बीच क्या अंतर होता है। इसके साथ ही बच्चों को पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक उपकरणों जैसे टियर गैस गन, बुलेट प्रूफ जैकेट और वायरलेस (आरटी सेट) की कार्यप्रणाली भी समझाई गई, जिसे बच्चों ने उत्सुकता से देखा और समझा।
पुलिस आयुक्त ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को सतर्क और जागरूक रहने की सलाह देते हुए कहा कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। पुलिस आयुक्त ने बच्चों से अपील की कि वे अपने माता–पिता और घर के बुजुर्गों को स्मार्टफोन, यूपीआई, ओटीपी और सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग के बारे में जागरूक करें, ताकि वे साइबर ठगी से बच सकें।
उन्होंने शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा जीवन को सही दिशा देने का सबसे सशक्त साधन है। साथ ही बच्चों को यह संदेश दिया कि “पुलिस आपकी मित्र है, उससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।” पुलिस आयुक्त ने अनुशासित जीवन को एक सफल नागरिक की पहचान बताते हुए बच्चों को नशे से दूर रहने की भी प्रेरणा दी।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों को मानवाधिकारों से जुड़े नियमों और आपराधिक प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई। उन्हें बताया गया कि किसी भी आरोपी को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही आपात स्थिति में पुलिस सहायता नंबर 112 की उपयोगिता भी समझाई गई।
थाने का भ्रमण कर बच्चों ने इसे एक नया, रोचक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से पुलिस के प्रति उनकी सोच बदली है और अब वे पुलिस को एक सहायक और मित्र के रूप में देखते हैं।
इस अवसर पर संयुक्त पुलिस आयुक्त (मुख्यालय/अपराध), पुलिस उपायुक्त पूर्वी, अपर पुलिस उपायुक्त पूर्वी सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी भी मौजूद रहे।
पुलिस आयुक्त ने बच्चों से किया सीधा संवाद, कोतवाली में स्कूली बच्चों ने जाना पुलिस का कामकाज