कानपुर-पुलिस आयुक्त कार्यालय के सभागार में पुलिस कर्मियों एवं नागरिकों को सीपीआर एवं बीएलएस का व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल द्वारा की गई इस अवसर पर संयुक्त पुलिस आयुक्त आशुतोष कुमार एवं संयुक्त पुलिस आयुक्त विनोद कुमार सिंह की गरिमामई उपस्थिति रही कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों, कार्यालयों, शाखाओं थानों में नियुक्त पुलिस कर्मियों के साथ-साथ जनसुनवाई हेतु अथवा पुलिस आयुक्त महोदय से मिलने आए नागरिकों ने भी सहभागिता की सीपीआर–बीएलएस का यह प्रशिक्षण आर.के. देवी हेल्थ केयर सॉल्यूशन की निदेशिका शुप्रभा दुबे एवं उनकी विशेषज्ञ टीम द्वारा प्रदान किया गया प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सीपीआर की प्रक्रिया के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया गया कि आपातकालीन स्थिति में जब किसी व्यक्ति की हृदय एवं फेफड़ों की क्रिया अचानक रुक जाती है, तब कृत्रिम विधि द्वारा इन क्रियाओं को बनाए रखने की प्रक्रिया को सीपीआर कहा जाता है जब यह प्रक्रिया बिना किसी उपकरण अथवा दवा के की जाती है, तो इसे सीपीआर–बीएलएस कहा जाता है विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में अकस्मात मृत्यु की घटनाओं में निरंतर वृद्धि हो रही है, जिनके प्रमुख कारण हृदयाघात, मस्तिष्क आघात (ब्रेन हैमरेज), सड़क दुर्घटनाएं, जहरीली गैस का प्रभाव, करंट लगना, डूबना आदि हैं। विशेष रूप से युवाओं में हृदयाघात एवं मस्तिष्क आघात की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले अधिकांश लोगों की आयु 50 वर्ष से कम होती है प्रशिक्षण के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि यदि घटनास्थल पर उपस्थित व्यक्ति को सीपीआर–बीएलएस का सही ज्ञान हो, तो अनेक अकस्मात होने वाली मौतों को रोका जा सकता है मानव शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग मस्तिष्क है, जिसे निरंतर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है यदि मस्तिष्क को 3 मिनट तक ऑक्सीजन न मिले, तो अपरिवर्तनीय क्षति प्रारंभ हो जाती है तथा 6 से 8 मिनट के भीतर व्यक्ति ब्रेन डेड हो सकता है विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी कारणवश किसी व्यक्ति की हृदयगति रुक जाती है, तो गोल्डन आवर (प्रथम 3 मिनट) के भीतर सही विधि से सीपीआर प्रारंभ कर तथा सीपीआर देते हुए पीड़ित को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने से उसकी जान बचाई जा सकती है यदि कोई व्यक्ति बेहोश है और सांस नहीं ले रहा है, तो बिना विलंब किए सीपीआर शुरू किया जाना चाहिए सीपीआर की प्रक्रिया के अंतर्गत सबसे पहले चेस्ट कंप्रेशन किया जाता है, जिसमें प्रति मिनट लगभग 120 बार सीने के मध्य भाग को 2 से 2.5 इंच तक दबाया जाता है इसके बाद 30 चेस्ट कंप्रेशन के पश्चात 2 बार मुँह से मुँह अथवा मुँह से मास्क द्वारा सांस दी जाती है यह प्रक्रिया 30:2 के अनुपात में तब तक जारी रखी जाती है, जब तक पीड़ित को अस्पताल पहुंचाकर किसी चिकित्सक अथवा प्रशिक्षित स्टाफ के सुपुर्द न कर दिया जाए कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि पुलिसकर्मी प्रायः दुर्घटनाओं एवं आपातकालीन घटनाओं में सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं ऐसे में प्रत्येक पुलिसकर्मी के लिए सीपीआर–बीएलएस का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उपस्थित पुलिस कर्मियों को विशेषज्ञों द्वारा सीपीआर का व्यावहारिक प्रदर्शन (डेमो) प्रस्तुत कर प्रशिक्षण दिया गया कार्यक्रम के अंत में पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल द्वारा आर. के. देवी हेल्थ केयर सॉल्यूशन की निदेशिका शुप्रभा दुबे एवं उनकी विशेषज्ञ टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा गया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण पुलिस कर्मियों को आपात स्थितियों में प्रभावी ढंग से कार्य करने में सक्षम बनाते हैं और समाज में जीवनरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गोल्डन आवर में जीवन रक्षा की पहल हेतु पुलिस कर्मियों व आमजनमानस को किया गया प्रशिक्षित