कानपुर।
बैंकिंग क्षेत्र में पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर अब बैंक कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन (UFBU) के सभी घटकों ने सरकार और इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान कर दिया है। यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही पाँच दिवसीय बैंकिंग को लेकर आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया, तो जनवरी के अंतिम सप्ताह में देशभर में बैंक कर्मी राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाएंगे।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के संयोजक कॉमरेड रजनीश गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2022 में ही UFBU और IBA के बीच पाँच दिवसीय बैंकिंग को लेकर सैद्धांतिक सहमति बन चुकी थी। इसके बाद हुई द्विपक्षीय वार्ताओं में वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के अधिकारियों ने भी शीघ्र निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। बावजूद इसके अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई, जिससे बैंक कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
कॉमरेड गुप्ता ने कहा,
“हमने बैंकिंग कार्य के घंटे बढ़ाने पर भी सहमति दी थी। 12वें द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर के समय भी यह स्पष्ट किया गया था कि पाँच दिवसीय बैंकिंग की हमारी प्रमुख मांग को जल्द मान लिया जाएगा, लेकिन लगातार हो रही देरी अब असहनीय हो चुकी है।”
यूनियन ने बैंक कर्मियों की मौजूदा कार्य स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। UFBU के सह-संयोजक कॉमरेड प्रवीण मिश्रा ने कहा कि बैंकिंग अब केवल कैश लेन-देन तक सीमित नहीं रह गई है। सेल्स टारगेट, थर्ड पार्टी प्रोडक्ट्स की बिक्री, निरंतर ऑडिट, डिजिटल ट्रांजेक्शन का दबाव और ग्राहकों की बढ़ती अपेक्षाओं के कारण कर्मचारियों और अधिकारियों पर मानसिक व शारीरिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
कॉमरेड मिश्रा ने कहा,
“बैंक कर्मियों का वर्क-लाइफ बैलेंस पूरी तरह बिगड़ चुका है। आज युवा कर्मचारियों में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। कार्य के अत्यधिक दबाव के चलते कर्मचारी अपने परिवार और सामाजिक जीवन के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं।”
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन ने अपनी मांग को पूरी तरह जायज बताते हुए तर्क दिया कि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और एलआईसी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में पहले से ही पाँच दिवसीय कार्य प्रणाली लागू है। इसके अलावा देश के लगभग सभी कॉर्पोरेट और आईटी सेक्टर में भी पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह प्रचलित है, ऐसे में बैंकों में इसे लागू न करना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
यूनियन नेताओं ने बताया कि पाँच दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर इससे पहले भी ज्ञापन सौंपे गए, बैज धारण कार्यक्रम, प्रादेशिक राजधानियों में सामूहिक प्रदर्शन और सभाओं का आयोजन किया गया, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई।
कॉमरेड रजनीश गुप्ता ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा,
“यदि सरकार अपने अड़ियल रवैये पर कायम रहती है, तो UFBU जनवरी के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल का आह्वान करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और IBA की होगी।”
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में लाए गए लेबर कोड बिल, बैंकों में एफडीआई (FDI) लाने की योजना और बार-बार किए जा रहे बैंक मर्जर को लेकर भी बैंक कर्मचारी और अधिकारी गंभीर रूप से नाराज़ हैं। यूनियन ने वित्त मंत्रालय से तत्काल हस्तक्षेप कर पाँच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करने की मांग की है।
इस मौके पर आयोजित सभा में कॉमरेड मनोज तिवारी, अंकुर द्विवेदी, अनिल सोनकर, अरविंद द्विवेदी, राजकुमार, अंकुर मिश्र, सुनील शुक्ला, अनुराग सिंह, पुष्कर मिश्रा, अंशुमान तिवारी, अंकित अवस्थी, नितिन शर्मा, आर.के. पांडे, शोभित शुक्ला, रोशुल सचान, विनय गोएनका, दीपू सिंह, अतुल सक्सेना, ईशान द्विवेदी, सौरभ कटियार, विपुल तिवारी, स्वप्निल त्रिपाठी, कुलदीप सिंह, आशुतोष दीक्षित सहित विभिन्न घटक यूनियनों के पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। सभा में सैकड़ों की संख्या में बैंक कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे और एक स्वर में पाँच दिवसीय बैंकिंग की मांग दोहराई।
5 दिवसीय कार्य सप्ताह पर बैंक यूनियनों का आंदोलन