कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो संचालन की दिशा में बड़ा कदम, छह नए सब-स्टेशन हुए ऊर्जीकृत

कानपुर।
कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) पर यात्री सेवा के विस्तार की तैयारियां तेज़ी से अंतिम चरण की ओर बढ़ रही हैं। इसी क्रम में बैलेंस सेक्शन कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक मेट्रो ट्रेनों की टेस्टिंग एवं स्टेशनों पर स्थापित विभिन्न विद्युत प्रणालियों के संचालन के लिए आवश्यक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई है। इस सेक्शन के सात में से छह मेट्रो स्टेशनों पर सब-स्टेशन तैयार कर उन्हें सफलतापूर्वक ऊर्जीकृत (एनर्जाइज) कर दिया गया है।
मेट्रो ट्रेनों की ट्रायल रनिंग, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन, ऑटोमैटिक फेयर कलेक्शन सिस्टम (एएफसी), एस्केलेटर, लिफ्ट, एयर कंडीशनिंग सिस्टम, लाइटिंग एवं अन्य विद्युत उपकरणों के संचालन के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति एक बुनियादी आवश्यकता होती है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) द्वारा बिजली से जुड़े सभी कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा किया जा रहा है।
यूपीएमआरसी के अनुसार, इस सेक्शन में चार मेट्रो स्टेशनों—झकरकटी, बारादेवी, बसंत विहार एवं नौबस्ता—पर 33 केवी ऑग्ज़ीलरी सब-स्टेशन (ASS) स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त किदवई नगर एवं बौद्ध नगर स्टेशनों पर ऑग्ज़ीलरी-कम-ट्रैक्शन सब-स्टेशन (ASS-cum-TSS) को भी ऊर्जीकृत कर दिया गया है। इन सब-स्टेशनों के चालू होने से अब मेट्रो ट्रेनों की टेस्टिंग और स्टेशनों पर सभी आवश्यक प्रणालियों का संचालन सुचारू रूप से किया जा सकेगा।
सब-स्टेशन की कार्यप्रणाली
कानपुर मेट्रो ट्रेनों के संचालन हेतु विद्युत आपूर्ति उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीटीसीएल) से प्राप्त की जाती है। कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक के बैलेंस सेक्शन में 33 केवी की बिजली आपूर्ति नयागंज मेट्रो स्टेशन स्थित ऑग्ज़ीलरी-कम-ट्रैक्शन सब-स्टेशन से ली जा रही है।
प्रत्येक ऑग्ज़ीलरी सब-स्टेशन में दो ऑग्ज़ीलरी ट्रांसफॉर्मर लगाए गए हैं, जबकि प्रत्येक ऑग्ज़ीलरी-कम-ट्रैक्शन सब-स्टेशन में दो ऑग्ज़ीलरी ट्रांसफॉर्मर के साथ दो ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर भी स्थापित किए गए हैं। ऑग्ज़ीलरी ट्रांसफॉर्मर की सहायता से 33 केवी विद्युत आपूर्ति को घटाकर 415 वोल्ट एसी में बदला जाता है, जिससे स्टेशन पर लगे एस्केलेटर, लिफ्ट, लाइटिंग, एसी सिस्टम आदि संचालित होते हैं।
वहीं ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर और रेक्टिफायर पैनल की मदद से 33 केवी एसी करंट को 750 वोल्ट डीसी में परिवर्तित किया जाता है, जिसका उपयोग मेट्रो ट्रेनों के संचालन के लिए किया जाता है। यह पूरी प्रणाली मेट्रो की सुरक्षित, सुचारू और निर्बाध सेवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
सब-स्टेशनों में ट्रांसफॉर्मरों की स्थापना के बाद सभी आवश्यक तकनीकी परीक्षण पूरे किए गए तथा इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर जनरल से आवश्यक प्रमाणन भी प्राप्त कर लिया गया है। अब बैलेंस सेक्शन में होने वाले ट्रायल रन के दौरान मेट्रो ट्रेनों को इन्हीं सब-स्टेशनों के माध्यम से बिजली आपूर्ति दी जाएगी।
यात्री सेवा विस्तार की दिशा में तेजी
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने बताया कि कानपुर मेट्रो के निर्माणाधीन बैलेंस सेक्शन पर फिनिशिंग कार्यों के साथ-साथ सिस्टम इंस्टॉलेशन के कार्य भी तेजी से पूरे किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सात में से छह स्टेशनों पर सब-स्टेशनों का ऊर्जीकृत होना इस बात का संकेत है कि परियोजना अपने निर्धारित लक्ष्य की ओर अग्रसर है।
उन्होंने आगे कहा कि मोतीझील से कानपुर सेंट्रल तक यात्री सेवा के विस्तार के सफल संचालन के बाद अब मेट्रो टीम पूरी प्रतिबद्धता के साथ कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता तक यात्री सेवा शुरू करने की तैयारी में जुटी हुई है। आने वाले समय में ट्रायल रन, सेफ्टी जांच और अन्य औपचारिकताओं के पूरा होते ही इस सेक्शन पर भी मेट्रो सेवा शुरू किए जाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए जाएंगे।
कानपुर मेट्रो के इस विस्तार से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि दक्षिणी कानपुर के लाखों लोगों को तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा भी उपलब्ध होगी।

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