यशोदा नगर बाईपास पर प्रताप होटल के पास स्थित है भव्या वेदा मेडिकल सेंटर
कानपुर ।
बांदा जनपद के निवासी शिवपूजन निषाद की बेटी गीतांजलि निषाद गंभीर बीमारी से जूझ रही थी। बच्ची के मस्तिष्क में अत्यधिक पानी भर जाने (हाइड्रोसेफेलस) के कारण उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजन बांदा से लेकर कानपुर के कई बड़े अस्पतालों में इलाज करा चुके थे, लेकिन कहीं भी संतोषजनक परिणाम नहीं मिला। लगातार इलाज के बावजूद जब राहत नहीं मिली तो परिवार निराशा के दौर से गुजरने लगा।
अंततः किसी परिचित की सलाह पर शिवपूजन निषाद ने यशोदा नगर बाईपास के आगे प्रताप होटल के निकट स्थित भव्या वेदा मेडिकल सेंटर से संपर्क किया। यहां अस्पताल की मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. स्वाति जायसवाल एवं डॉ. हिमांशु गुप्ता ने मरीज को गंभीरता से जांचा। एक्स-रे, सीटी स्कैन व अन्य मेडिकल रिपोर्टों का गहन अध्ययन करने के बाद डॉक्टरों ने मरीज को दिमागी टीबी के साथ हाइड्रोसेफेलस (TBM with Hydrocephalus) से पीड़ित पाया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने बिना देरी किए ऑपरेशन की तैयारी शुरू की। अनुभवी न्यूरो सर्जन डॉ. एस. जी. वर्मा के नेतृत्व में पूरी मेडिकल टीम ने सफल सर्जरी को अंजाम दिया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और अब गीतांजलि निषाद स्वस्थ होकर जीवन की ओर लौट रही है।
मरीज के पिता शिवपूजन निषाद ने बताया कि वे पेशे से एक प्राइवेट मास्टर हैं और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। बेटी के इलाज में उनकी सारी जमा पूंजी खर्च हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि “कई अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन कहीं राहत नहीं मिली। भव्या वेदा मेडिकल सेंटर आने के बाद हमें उम्मीद भी मिली और इलाज भी सफल हुआ। सबसे बड़ी बात यह रही कि यहां कम खर्च में बेहतर इलाज किया गया।”
इस सफल ऑपरेशन व इलाज में डॉ. एस. जी. वर्मा (न्यूरो सर्जन), डॉ. नितिन गुप्ता (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ), ऋषभ (ओटी असिस्टेंट), अख्तर खान एवं अर्पित गुप्ता की टीम का विशेष योगदान रहा। इलाज के बाद मरीज के परिजनों ने भव्या वेदा मेडिकल सेंटर की डायरेक्टर डॉ. स्वाति जायसवाल एवं डॉ. हिमांशु गुप्ता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल न केवल आधुनिक सुविधाओं से लैस है, बल्कि यहां गरीब व जरूरतमंद मरीजों को भी संवेदनशीलता के साथ बेहतर और सस्ता इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है।
भव्या वेदा मेडिकल सेंटर की विशेषज्ञ टीम ने बचाई मरीज की जान, सफल न्यूरो सर्जरी से मिला नया जीवन