अतिथियों ने मानव मर्यादा, समानता और न्याय के सिद्धांतों पर रखे सारगर्भित विचार
कानपुर– छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के अवसर पर सेंटर ऑफ़ एकेडेमिक्स के कॉन्फ्रेंस कक्ष में एक महत्वपूर्ण विशेष अतिथि व्याख्यान का आयोजन अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ़ लीगल स्टडीज़, विधि विभाग के तत्वावधान में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों और विधि विशेषज्ञों ने मानवाधिकारों के वैश्विक महत्व, चुनौतियों और व्यावहारिक अनुपालन पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं संसाधन व्यक्ति डॉ. बी.डी. पांडे, जेल अधीक्षक, जिला कारागार कानपुर नगर रहे, जबकि अध्यक्षता प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, निदेशक एवं प्रो-वीसी, सीएसजेएमयू ने की। प्रो. अवस्थी ने मुख्य अतिथि डॉ. पांडे और विशेष अतिथि श्री बाजपेयी का पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि घृणा अपराध से होनी चाहिए, अपराधी से नहीं। उन्होंने मानवाधिकारों के संदर्भ में शिक्षा के महत्व, लिंग या सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव की अनुचितता तथा मानव मूल्य आधारित पाठ्यक्रमों के समावेशन पर जोर दिया। साथ ही न्याय के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु विधिक सहायता कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता बताई।
मुख्य वक्ता डॉ. बी.डी. पांडे ने मानवाधिकारों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा (UDHR) तथा उसके अंगीकरण में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने जनपद कारागारों में मानवाधिकार उल्लंघन की संभावनाओं और सुधारों को रेखांकित करते हुए अपने प्रशासनिक अनुभव साझा किए। वाराणसी जेल में अपने कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने आधुनिक तकनीकी संसाधनों के प्रयोग, सुधारात्मक उपायों तथा कैदियों को किडनी एवं कैंसर जैसी गंभीर चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराने में जिला अस्पताल के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका बताई।
कार्यक्रम के अंत में अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल ऑफ़ लीगल स्टडीज़ के सहायक निदेशक समीउद्दीन ने संसाधन व्यक्ति, प्रो-वीसी तथा सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शशिकांत त्रिपाठी, आशुतोष बाजपेयी, डॉ. दिव्यांश शुक्ला, डॉ. स्मृति रॉय सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
विशेष अतिथि के रूप में आशुतोष बाजपेयी, अध्यक्ष – एएमएससीएस कानपुर ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
यह कार्यक्रम मानव मर्यादा, समानता और न्याय के सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से उजागर करता हुआ राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस की मूल भावना को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है।