संग साझा की खुशियाँ
कानपुर नगर,
कलेक्ट्रेट सभागार शुक्रवार को दीपावली के दीपों से ज्यादा उन नन्हीं आँखों की चमक से रोशन था, जिन्होंने कोविड महामारी में अपने माता-पिता दोनों को खो दिया। गम के अंधेरे से गुज़र चुके इन बच्चों के चेहरों पर मुस्कान तब झलकी जब जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने उन्हें मिठाई, दीया-बत्ती, चॉकलेट और किताबें भेंट की।
जिलाधिकारी ने बच्चों से कहा कि वे उनके जैविक पिता नहीं हैं, लेकिन एक जिलाधिकारी के रूप में उनके वैधानिक अभिभावक हैं और उनकी देखभाल करना उनका कर्तव्य है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कोई भी बच्चा अकेला महसूस न करे, प्रशासन और सरकार हर समय उनके साथ हैं।
बच्चों ने इस अवसर पर अपने सपनों को साझा किया। किसी ने डॉक्टर बनने की इच्छा जताई, किसी ने इंजीनियर या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने का लक्ष्य रखा। कुछ बच्चों ने एथलीट बनने का सपना बताया, जबकि कई ने आईएएस और आईपीएस बनकर देश की सेवा करने का संकल्प लिया। जिलाधिकारी ने बच्चों को करियर काउंसलिंग दी और समझाया कि कड़ी मेहनत, अनुशासन और धैर्य से कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया कि वे अपने लक्ष्य की ओर आत्मविश्वास के साथ बढ़ें।
कक्षा दसवीं की छात्रा गरिमा सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की योजनाओं की वजह से उनके सपने ज़िंदा हैं। उन्होंने दीपावली को खास बनाने के लिए जिलाधिकारी का आभार व्यक्त किया। सिंधुजा यादव ने कहा कि इस आयोजन से उन्हें यह एहसास हुआ कि वे अकेली नहीं हैं और समाज तथा प्रशासन हर कदम पर उनका संबल हैं।
जिलाधिकारी ने बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत प्रतिमाह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता, 23 वर्ष की आयु पूरी होने पर दस लाख रुपये की एकमुश्त धनराशि, आयुष्मान भारत योजना से पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवरेज, और पढ़ाई के लिए लैपटॉप व टैबलेट प्रदान करने की जानकारी दी।
इस अवसर पर सम्मानित बच्चों में परिधि श्रीवास्तव, अद्वित मिश्रा, आराध्या मिश्रा, बबीता कपूर, सतीश कपूर, उत्कर्ष त्रिपाठी, वैष्णवी गुप्ता, अमन गुप्ता, नैतिक चड्ढा, परी मिश्रा, खुशी मिश्रा, रिद्धिमा कपूर, इशिता गुप्ता, तनिष्क गुप्ता, मानविक त्रिवेदी, अभिनव सिंह, गरिमा सिंह, अश्वनी कुमार, सिंधुजा यादव, संध्या, दिव्या और झलक शामिल थे।
डीएम ने बच्चों के साथ आए परिजनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यदि रिश्तेदार और समाज इन बच्चों की मदद के लिए आगे आएं तो यह पूरे प्रदेश के लिए सकारात्मक संदेश होगा।