मनीष गुप्ता
कानपुर।
भारतीय डाक विभाग द्वारा 1 अक्टूबर से रजिस्ट्री (पंजीकृत डाक) सेवा बंद कर उसे स्पीड पोस्ट में विलय किए जाने के निर्णय का केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने विरोध जताया। बड़े चौराहा स्थित मुख्य डाकघर में मंच के प्रतिनिधियों ने पोस्ट मास्टर जनरल के माध्यम से राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा। संयुक्त मंच के संयोजक असित कुमार सिंह ने कहा कि यह निर्णय पूरी तरह जनविरोधी है और इसका लाभ निजी कोरियर कंपनियों को मिलेगा। अब तक रजिस्ट्री सेवा की न्यूनतम दर ₹35 थी, जो नई व्यवस्था में ₹41 से शुरू होगी। इससे गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग प्रभावित होंगे, जिन्हें कम खर्च में पत्र और दस्तावेज भेजने की सुविधा मिलती थी।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि सरकार ने यह नीति जारी रखी तो डाक विभाग का हाल भी बीएसएनएल जैसा हो जाएगा। प्रतिनिधि मंडल में कॉमरेड उमेश शुक्ला, तारणि कुमार पासवान, मो. वशी, राणा प्रताप सिंह, आर.डी. गौतम, योगेश ठाकुर, कैलाश पासवान, सैयद हामिद अली रिज़वी, कैलाश यादव, सिकंदर कुमार और घुरहू कुशवाहा शामिल रहे।
रजिस्ट्री सेवा बंद के विरोध में ट्रेड यूनियनों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा