मनीष गुप्ता
कानपुर उत्तर प्रदेश में 23 सितंबर 1951 को जन्मे सेठ मुरारी लाल अग्रवाल ने अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और दृढ़ निश्चय के बल पर जीवन में वह मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना केवल बड़े सपने देखने वाले लोग ही कर सकते हैं। उनके पिता स्वर्गीय राम कुमार अग्रवाल कासगंज के प्रमुख मनी लेंडिंग व्यवसायी थे, जबकि माताजी सरल, सहनशील और आदर्श गृहिणी थीं। पारिवारिक संस्कारों से मिली ईमानदारी, करुणा और जिम्मेदारी की सीख ने ही मुरारी लाल सेठ को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कानपुर में अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआती संघर्ष और कठिनाइयों को पार करते हुए उन्होंने उद्योग जगत में अपनी अलग पहचान बनाई। आज एमएलए ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज उनका स्थापित साम्राज्य है, जो 42 देशों में अपने उत्पादों का निर्यात कर भारत का नाम रोशन कर रहा है। उनके नेतृत्व और प्रबंधन कौशल ने इस संस्था को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खड़ा किया है। लेकिन मुरारी लाल ने केवल एक सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि समाजसेवी भी हैं। वह गरीबों और वंचितों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं। किसी जरूरतमंद की आवाज उन तक पहुँचे और वह मदद न करें, ऐसा शायद ही कभी हुआ हो। समाज की भलाई के लिए वह कई संस्थाओं से जुड़े हुए हैं और शिक्षा, स्वास्थ्य तथा सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। नेतृत्व क्षमता की बात करें तो वह कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी छाप छोड़ चुके हैं। वह आईआईए (इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन) और लघु उद्योग भारती के वरिष्ठ सदस्य रहे हैं और उद्योग जगत की समस्याओं के समाधान के लिए लगातार सक्रिय रहते हैं। साथ ही, कानपुर क्लब के चेयरमैन पद पर रहते हुए उन्होंने अपने संगठनात्मक कौशल और दूरदर्शिता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जितनी ऊँचाइयाँ उन्होंने व्यवसाय में पाई हैं, उतनी ही गहराई से वह मानवीय संवेदनाओं से जुड़े हुए हैं। सफलता ने उनके व्यक्तित्व को और अधिक विनम्र और सेवाभावी बनाया है। समाज में उन्हें हमेशा ऐसे व्यक्ति के रूप में देखा जाता है जो जरूरतमंदों की मदद को सबसे पहले आगे आते हैं।आज उनके जन्मदिन पर हम न केवल उनके उद्योग जगत में किए गए योगदान को याद करते हैं, बल्कि उनके सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों को भी सलाम करते हैं। मुरारी लाल अग्रवाल जी जैसी शख्सियतें ही आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं कि जीवन का असली उद्देश्य केवल सफलता पाना नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी रोशनी भरना है।