भारतीय न्याय व्यवस्था के विपरीत और वादकारी विरोधी अधिसूचना को वापस ले केंद्र सरकार

कानपुर कोर्ट में दिल्ली के अधिवक्ताओं की कई दिनों से चल रही हड़ताल पर बोलते हुए
पंडित रवीन्द्र शर्मा पूर्व अध्यक्ष लॉयर्स एसोसिएशन ने बताया कि दिल्ली के एल जी द्वारा 13 अगस्त को अधिसूचना जारी की गई की पुलिस के अधिकारियो और कर्मचारियों की गवाही निश्चित किए गए थानों में वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी। इससे गवाही हेतु पुलिस को अदालत नही आना होगा। यह अधिसूचना वादकारी का हित सर्वोच्च सिद्धांत के खिलाफ होने के साथ ही भारतीय न्याय व्यवस्था के भी विपरीत है इस जनविरोधी अधिसूचना के विरोध में दिल्ली के अधिवक्ता निरंतर हड़ताल पर हैं हमारा मानना है कि इस अधिसूचना के द्वारा केंद्र सरकार पुलिसिया राज कायम करना चाहती है थानों में पुलिस की गवाही से सही और निष्पक्ष न्याय नही हो पाएगा। पुलिस जिसे चाहेगी उसे बंद करेगी और अपने थानों में ही बैठकर गवाही दे जिसे चाहेगी उसे सजा कराएगी जो हमारी अधिवक्तावृत्ति को सीधे सीधे प्रभावित करेगा और एक प्रकार से थानों से ही निर्णय होने लगेंगे जो भारतीय न्याय व्यवस्था के विपरीत है।हमारा यह भी मानना है कि अभी इसे दिल्ली में प्रयोग के तौर पर लाया गया है यदि सफल हो गए तो फिर पूरे देश में लाया जाएगा। यह अधिसूचना अधिवक्ता वृत्ति पर भी विपरीत प्रभाव डालेगी।प्रमुख रूप से अनुराग श्रीवास्तव पूर्व महामंत्री बार एसोसिएशन भानू प्रताप द्विवेदी द्वारिका नाथ त्रिवेदी देवी।प्रसाद मिश्र संजीव कपूर नूर आलम आयुष शुक्ला शिवम गंगवार शुभम जोशी इंद्रेश मिश्रा मो फैजान प्रियम ऋषभ मिश्रा वीर जोशी के के यादव आदि रहे।

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