मनीष गुप्ता
कानपुर। काशीराम अस्पताल में हर बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या एक विकराल रूप धारण कर लेती है। दो दिनों की सामान्य बारिश ने ही अस्पताल परिसर को ऐसा बना दिया मानो यह कोई चिकित्सा केंद्र नहीं, बल्कि पानी से लबालब भरा तालाब हो। अस्पताल में आईं मरीजों की जिंदगी जहां एक ओर बीमारी से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर जलभराव की वजह से इलाज तक पहुंचना भी एक चुनौती बन गया है।
जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर विभिन्न विभागों तक पानी भर गया है। मरीजों के साथ आए तीमारदारों को मजबूरी में इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है और अस्पताल में पहले से ही मौजूद बीमारियों के साथ-साथ जलजनित रोगों के फैलने की आशंका भी तेज हो गई है।
स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों ने प्रशासन से बार-बार अपील की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। लोगों का कहना है कि जब भी थोड़ी सी बारिश होती है, अस्पताल का यही हाल हो जाता है, लेकिन इसके बाद भी नगर निगम और अस्पताल प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है।
जल निकासी की समस्या पर प्रशासन मौन
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन, नगर आयुक्त, और अस्पताल प्रबंधन—तीनों ही इस गंभीर स्थिति पर चुप्पी साधे हुए हैं। किसी भी अधिकारी ने अभी तक स्थल पर पहुंच कर निरीक्षण नहीं किया है, न ही कोई वैकल्पिक उपाय किए गए हैं।
यह स्थिति न केवल प्रशासन की उदासीनता को उजागर करती है, बल्कि यह सवाल भी खड़े करती है कि क्या मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं? आखिरकार, जिन लोगों को इलाज की सबसे अधिक जरूरत है, वे ही जब अस्पताल तक सुरक्षित नहीं पहुंच पा रहे, तो इस व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जनता की मांग: हो स्थायी समाधान
स्थानीय निवासी और अस्पताल आने वाले तीमारदारों की यही मांग है कि अस्पताल परिसर की जल निकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता पर सुधारा जाए। अगर यही हालात रहे, तो न केवल मरीजों को गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा, बल्कि यह एक बड़े जनस्वास्थ्य संकट में भी बदल सकता है।