महंत आनंद कपूर के अस्वस्थ होने से इस बार नहीं बंटे सिक्के, श्रद्धालुओं को करना पड़ा इंतजार
कानपुर। बिरहाना रोड स्थित मां वैभव लक्ष्मी मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान इस बार खजाना वितरण नहीं हो सका। मंदिर के मुख्य महंत आनंद कपूर के अस्वस्थ होने के कारण इस परंपरा को स्थगित करना पड़ा। उपचार के लिए लखनऊ स्थित पीजीआइ में भर्ती महंत के स्वस्थ होने की कामना के बीच श्रद्धालुओं को इस बार माता के प्रसाद स्वरूप मिलने वाले सिक्कों के बिना ही लौटना पड़ा। हालांकि, मंदिर में माता के दर्शन, पूजा-अर्चना और आरती नियमित रूप से जारी रही। मंदिर का इतिहास करीब 130 वर्ष पुराना बताया जाता है। पारिवारिक दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1889 या 1894 के आसपास कपूर परिवार के पूर्वजों ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। शुरुआती दौर में यहां भगवान शिव और राधा-कृष्ण की पूजा-अर्चना होती थी। वर्ष 2000-2001 के दौरान मां वैभव लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित होने के बाद मंदिर की पहचान इसी नाम से प्रसिद्ध हुई। मान्यता है कि मंदिर के प्रबंधक की पत्नी को स्वप्न में मां लक्ष्मी के दर्शन हुए थे। इसके बाद माता की प्रतिमा स्थापित करने और भक्तों को सिक्के प्रसाद स्वरूप वितरित करने की परंपरा शुरू हुई।
मंदिर की विशेषता मां लक्ष्मी की ऐसी प्रतिमा है, जिसमें दोनों हाथ वरद मुद्रा में हैं। श्रद्धालु इसे सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक मानते हैं। नवरात्र के शुक्रवार को माता के पूजन के बाद वितरित किए जाने वाले सिक्कों को भक्त खजाना कहते हैं। मान्यता के अनुसार, इन सिक्कों को लाल कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या लॉकर में रखने से सुख-समृद्धि बनी रहती है। धनतेरस और दीपावली पर मंदिर में असली नोटों से भव्य सजावट भी की जाती है। इसे देखने के लिए कानपुर के साथ अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस बार खजाना वितरण नहीं होने से मंदिर की इस परंपरा से जुड़े भक्तों को निराशा हुई। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि महंत आनंद कपूर के स्वस्थ होने के बाद आने वाले समय में खजाना वितरण की परंपरा फिर शुरू होगी।