कानपुर। भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, संस्कृति और गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से नेहरू नगर में गुरुकुल संगीत विद्यापीठ का शुभारंभ भव्य एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आयोजित समारोह में अतिथियों ने भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक अरुण पाठक, विशिष्ट अतिथि डॉ. रेनू निगम तथा अध्यक्ष इंद्रमोहन रोहतगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इसके बाद राग हंसध्वनि पर आधारित महाकवि निराला की रचित सरस्वती वंदना की प्रभावशाली प्रस्तुति धान्या सचान, श्वेता सिंह, अभिव्यंजना सिंह, रिद्धि जैन, कोमल, महक, अंतरा कुशवाहा, प्रभलीन कौर, सोनम यादव और पावनी मिश्रा ने दी।
अतिथियों के स्वागत में राग मालकोंस पर आधारित “शुभ मुहूर्त मंगल बेला” स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया, जिसने पूरे वातावरण को भक्तिमय और संगीतमय बना दिया। इसके उपरांत भारतीय शास्त्रीय संगीत के राग यमन पर बंदिश, आलाप और तान की प्रस्तुति सौरभ सिंह, मनीष सिंह, हिमांशु निगम, अंश त्रिपाठी, नासिर खान, देवांश, शशांक, अरविंद कुमार और हर्षित कुमार ने दी, जिसे उपस्थित संगीत प्रेमियों ने खूब सराहा।
लोकसंगीत की प्रस्तुति में पारुल अग्रवाल, विधु मिश्रा, शिल्पी श्रीवास्तव, सुमन बाजपेई, तूलिका निगम, पीहू पांडे और सलमा खान ने कजरी प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। वहीं गुरुकुल के छात्र विवेक वर्मा ने लोकगीत और कथक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
कार्यक्रम में तबले पर अवनीश राज और मिलिंद पाटणकर, ढोलक पर हिमांशु निगम तथा कीबोर्ड पर अंश त्रिपाठी ने शानदार संगत कर प्रस्तुतियों को और प्रभावशाली बनाया।
मुख्य अतिथि विधायक अरुण पाठक ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आत्मा संगीत और संस्कारों में बसती है। उन्होंने गुरुकुल संगीत विद्यापीठ की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संस्थान नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. रेनू निगम ने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, अनुशासन और संवेदनशीलता विकसित करने का सशक्त साधन है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे इंद्रमोहन रोहतगी ने गुरुकुल संगीत विद्यापीठ के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल बताया।
संस्था की संस्थापक एवं निदेशक कविता सिंह ने बताया कि गुरुकुल संगीत विद्यापीठ का उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकसंगीत, संस्कृति, संस्कार और गुरु-शिष्य परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है, ताकि विद्यार्थियों में कला के साथ-साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का भी विकास हो सके।
इस अवसर पर सत्येंद्र सिंह तोमर, आशुतोष तिवारी, ओसामा गयास सैयद, दीपक निगम, डॉ. रोचना बिश्नोई, डॉ. रीता वर्मा, डॉ. आदर्श त्रिपाठी, प्रियदर्शी निगम, समदर्शी निगम, सचिवेंद्र सिंह सेंगर सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, संगीत प्रेमी, अभिभावक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में गुरुकुल के प्रधानाचार्य दिवाकर निगम ने सभी अतिथियों, सहयोगियों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।
नेहरू नगर में गुरुकुल संगीत विद्यापीठ का शुभारंभ, शास्त्रीय संगीत की सुरधारा से गूंजा समारोह