प्रवर्तन दस्ते पर भू-माफिया से सांठगांठ का आरोप, सचिव से निष्पक्ष जांच की मांग
कानपुर। कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) द्वारा भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच अब उसके प्रवर्तन दस्ते की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। रूमा क्षेत्र से सामने आए एक मामले में पीड़ित पक्ष के पैरोकार ने केडीए के प्रवर्तन दस्ते पर भू-माफिया से सांठगांठ कर कार्रवाई में खानापूर्ति करने का आरोप लगाया है। मामले की शिकायत केडीए सचिव से करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
शिकायतकर्ता एवं पैरोकार शरद लोचन शुक्ला के अनुसार रूमा क्षेत्र स्थित आराजी संख्या 236, 237, 238, 229 और 239 में कथित अवैध कब्जे को लेकर 29 मई 2026 को उप जिलाधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सरकारी भूमि से सटी एक निजी भूमि पर अवैध रूप से बाउंड्रीवॉल और गेट बनाकर कब्जा किया गया है, जिससे आसपास की अन्य जमीनों पर भी अतिक्रमण का खतरा पैदा हो गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मामला सही पाए जाने पर उप जिलाधिकारी ने संबंधित प्रकरण में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद केडीए का प्रवर्तन दस्ता मौके पर पहुंचा, लेकिन कार्रवाई के दौरान केवल औपचारिकता निभाई गई। आरोप है कि मुख्य अवैध निर्माण को हटाने के बजाय केवल पीछे के एक छोटे हिस्से को गिराकर कार्रवाई पूरी दिखा दी गई।
पैरोकार ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के बाद उसका वीडियो बनाकर वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया गया और मीडिया में भी यह प्रचारित किया गया कि अवैध निर्माण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की गई है। जबकि वास्तविकता में मुख्य कब्जे को यथावत छोड़ दिया गया। शिकायतकर्ता का दावा है कि यह सब विपक्षी पक्ष से मिलीभगत के चलते किया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित भूमि के आसपास बड़ी मात्रा में सरकारी जमीन मौजूद है, जिस पर भविष्य में अतिक्रमण की आशंका बनी हुई है। ऐसे में यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो सरकारी संपत्ति को नुकसान हो सकता है। मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने केडीए सचिव से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही यह भी जांच की जाए कि कार्रवाई के दौरान कहीं अधिकारियों और कब्जाधारियों के बीच किसी प्रकार की सांठगांठ तो नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि सरकारी और निजी भूमि को पूर्ण रूप से कब्जा मुक्त कराया जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। फिलहाल शिकायत के बाद मामला केडीए प्रशासन के संज्ञान में पहुंच गया है। अब देखना होगा कि प्राधिकरण इस मामले में क्या रुख अपनाता है और शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच किस प्रकार कराई जाती है।