सरकारी अस्पताल से गायब, प्राइवेट क्लीनिक में इलाज! वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप, CMO की चुप्पी पर उठे सवाल

सरकारी ड्यूटी के दौरान प्राइवेट क्लीनिक में मरीज देखने के आरोपों से घिरे डॉक्टर का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था कटघरे में, अब कानपुर CMO के “जांच कराएंगे” बयान पर उठ रहे कई बड़े सवाल

कानपुर/फतेहपुर। बिठौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात अधीक्षक एवं मेडिकल ऑफिसर डॉ. वी.के. चौरसिया से जुड़ा कथित प्राइवेट प्रैक्टिस मामला अब लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि फतेहपुर में सरकारी जिम्मेदारी निभाने वाले डॉक्टर कानपुर के नौबस्ता क्षेत्र स्थित जय हिंद पाली क्लीनिक में मरीज देखते नजर आ रहे हैं।वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों और मरीजों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अव्यवस्थाओं से मरीज पहले ही परेशान रहते हैं। समय पर इलाज न मिलने से गरीब मरीजों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। ऐसे में यदि सरकारी डॉक्टर निजी क्लीनिक में सेवाएं देते पाए जाते हैं तो यह सीधे तौर पर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही मानी जाएगी।अब सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है। आखिर यदि डॉक्टर लंबे समय से निजी प्रैक्टिस कर रहे थे तो विभागीय अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? क्या अस्पतालों की उपस्थिति सिर्फ रजिस्टरों तक सीमित रह गई है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कभी औचक निरीक्षण नहीं किया गया। इन सवालों ने पूरे विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक अब डॉक्टर की उपस्थिति पंजिका, ड्यूटी रिकॉर्ड और अवकाश से जुड़े दस्तावेजों की जांच की तैयारी चल रही है। विभाग यह भी खंगाल सकता है कि सरकारी ड्यूटी के दौरान कितनी बार अस्पताल से अनुपस्थिति रही और क्या उस दौरान मरीजों की चिकित्सा सेवाएं प्रभावित हुईं। इसी बीच आज कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) से इस मामले में बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि जय हिंद पाली क्लीनिक का रजिस्ट्रेशन है या नहीं, क्लीनिक किस डॉक्टर के नाम से संचालित हो रहा है और वहां कौन-कौन चिकित्सक मरीज देख रहे हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। हालांकि CMO के इस बयान के बाद अब कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। लोग पूछ रहे हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग को अब तक इस क्लीनिक और वहां चल रही गतिविधियों की कोई जानकारी नहीं थी? यदि सब कुछ नियमों के तहत चल रहा था तो अब जांच की जरूरत क्यों पड़ी, और यदि अनियमितताएं थीं तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।वायरल वीडियो के बाद यह मामला अब केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर सवाल उठने लगे हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी या फिर यह प्रकरण भी अन्य मामलों की तरह कागजों में सिमटकर रह जाएगा।
फिलहाल खबर के आखिर में आप इस तरह की लाइन जोड़ सकते हैं ।
मामले में कानपुर नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का पक्ष सामने आ चुका है, जबकि फतेहपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी का आधिकारिक बयान अभी आना बाकी है। चूंकि संबंधित चिकित्सक की तैनाती फतेहपुर जनपद में है, इसलिए अब सभी की नजर फतेहपुर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और वहां के CMO के जवाब पर टिकी हुई है।

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