विभागीय लापरवाही से 80 प्रतिशत तालाबों पर कब्जे, सूखे हैंडपंपों ने बढ़ाई लोगों की परेशानी
कानपुर। शहर और आसपास के इलाकों में तालाबों पर लगातार हो रहे अवैध कब्जों ने जल संरक्षण व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। विभागीय लापरवाही के चलते पारंपरिक तालाब तेजी से खत्म होते जा रहे हैं। कई तालाब कूड़ा फेंकने और गंदे पानी के संग्रह स्थल में बदल चुके हैं, जिससे वर्षा जल संचयन भी प्रभावित हो रहा है।
कल्याणपुर, रावतपुर, आवास विकास, मिर्जापुर, यशोदानगर, बार्रा, न्यू आजाद नगर, सतबरी और बारासिरोही समेत कई क्षेत्रों में तालाबों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दलालों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से तालाबों को मिट्टी डालकर भरा जा रहा है और फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीनों की खरीद-फरोख्त हो रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार तालाब भूजल स्तर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन अतिक्रमण बढ़ने से शहर का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। जहां पहले 70 से 80 फीट पर पानी मिल जाता था, वहीं अब 150 फीट से अधिक गहरी बोरिंग करनी पड़ रही है। शहर के करीब 95 प्रतिशत कुएं भी सूख चुके हैं।
सतबरी गांव सहित कई इलाकों में तालाबों की जमीन पर मकान और बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। नगर में कुल 136 तालाब बताए जाते हैं, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पर कब्जा हो चुका है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते तालाबों को अतिक्रमण से मुक्त नहीं कराया गया तो आने वाले वर्षों में शहर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
सूखे हैंडपंप बढ़ा रहे परेशानी
शहर में जल संकट की एक बड़ी वजह अधिकांश हैंडपंपों का सूख जाना भी है। कई हैंडपंप वर्षों से खराब पड़े हैं और जो चल रहे हैं, उन्हें स्थानीय लोग अपने खर्च पर चलवा रहे हैं। गर्मी में राहगीरों को सड़क किनारे पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं हो पाता। मजबूरी में लोग पैकेज्ड पानी और अन्य पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। लोगों का आरोप है कि विभागीय उदासीनता के कारण हैंडपंपों की मरम्मत नहीं कराई जा रही।