जब एक फौजी थर्माकोल के डिब्बे में माँ का कटा हाथ लेकर पहुंचा कमिश्नर दफ्तर

कानपुर। कानून के रखवाले उस वक्त सन्न रह गए जब देश की सीमा की रक्षा करने वाला एक जांबाज सिपाही दफ्तर में इंसाफ की गुहार लगाने पहुंचा, लेकिन उसके हाथ में कोई फाइल नहीं बल्कि उसकी माँ का कटा हुआ हाथ था! थर्माकोल के बॉक्स में माँ का हाथ देखकर अफसरों के पसीने छूट गए। यह झकझोर देने वाला मामला कानपुर के टाटमिल चौराहा स्थित कृष्णा अस्पताल की कथित घोर लापरवाही से जुड़ा है। ‘कब्ज’ के इलाज में गंवाना पड़ा हाथ मूल रूप से फतेहपुर (ग्राम आलीमऊ, थाना हथगाम) के रहने वाले विकास सिंह आईटीबीपी (महाराजपुर) में कांस्टेबल हैं। विकास ने बताया कि उनकी 56 वर्षीय माँ निर्मला देवी को सांस, कमजोरी और पेट में कब्ज की समस्या थी। महाराजपुर आईटीबीपी अस्पताल से प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें पैनल के ‘कृष्णा नर्सिंगहोम’ (टाटमिल) रेफर किया गया।
आरोप है कि यहाँ इलाज के दौरान डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर मौजूद महिला को ऐसा गलत इंजेक्शन लगाया कि उनका हाथ धीरे-धीरे काला पड़ने लगा और भयंकर सूजन आ गई।
एक अस्पताल की लापरवाही, दूसरे में हुआ ऑपरेशन
जब माँ की हालत बिगड़ने लगी, तो विकास उन्हें आनन-फानन में बिठूर रोड स्थित पारस हॉस्पिटल ले गए। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों के मुताबिक, संक्रमण (इंफेक्शन) पूरे हाथ में फैल चुका था। माँ की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को मजबूरी में उनका हाथ काटना पड़ा।
कांस्टेबल विकास सिंह ने रोते हुए कहा
जिन हाथों ने मुझे बचपन से पाल-पोसा, आज देश की सेवा में होने के बाद भी मैं उन हाथों को कटने से नहीं बचा सका। मुझे अपनी माँ के लिए सिर्फ और सिर्फ इंसाफ चाहिए।
अस्पताल का ‘खतरनाक’ ट्रैक रिकॉर्ड
विकास के साथ पहुंचे आईटीबीपी के लिसिनिंग ऑफिसर अर्पित सिंह ने अस्पताल प्रबंधन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि इसी कृष्णा अस्पताल की लापरवाही के कारण पूर्व में आईटीबीपी की एक महिला कांस्टेबल और एक इंस्पेक्टर की भी जान जा चुकी है। यही वजह है कि बल के अधिकारी खुद अपने जवान को न्याय दिलाने के लिए साथ खड़े हैं।
पुलिस कमिश्नर का एक्शन और आश्वासन
इस खौफनाक मंजर को देखने के बाद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया। जवान को ढांढस बंधाते हुए उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को एक विशेष पैनल गठित कर जांच के आदेश दिए हैं।टाटमिल स्थित कृष्णा अस्पताल और सिंहपुर स्थित पारस हॉस्पिटल दोनों की भूमिका की बारीकी से जांच की जाएगी।एसीपी-स्टाफ अफसर अमरनाथ यादव के अनुसार, सच का पता लगाने के लिए कटे हुए हाथ की फोरेंसिक जांच के निर्देश भी दे दिए गए हैं। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सीएमओ की जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त एफआईआर (FIR) दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद ही पीड़ित फौजी के आंसू थमे।

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