कानपुर के आरटीओ कार्यालय से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने वाहन ट्रांसफर प्रक्रिया और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक मृत व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखाकर उसकी स्कॉर्पियो कार दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर कर दी गई। मामले का खुलासा तब हुआ जब मृतक की पत्नी खुद आरटीओ कार्यालय पहुंची और वाहन ट्रांसफर पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया। जांच के दौरान सामने आया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर वाहन ट्रांसफर किया गया, उनमें मृतक के हस्ताक्षर दर्शाए गए हैं, जबकि उनकी मौत काफी पहले हो चुकी थी।
जानकारी के अनुसार किदवई नगर निवासी गरिमा दुबे ने अपनी स्कॉर्पियो कार संख्या UP 78 FJ 0449 को बेचने का सौदा किया था। उनका आरोप है कि सिद्धार्थ शुक्ला नामक व्यक्ति ने वाहन खरीदने के लिए कुल 9 लाख 30 हजार रुपये में डील की थी। इसमें से 8 लाख 30 हजार रुपये आरटीजीएस के माध्यम से दिए गए, जबकि बाकी 1 लाख रुपये का चेक दिया गया जो बाद में बाउंस हो गया। पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने बाकी रकम की मांग की तो आरोपी ने दावा किया कि वाहन पहले ही उसके नाम ट्रांसफर हो चुका है।
यह बात सुनकर महिला हैरान रह गईं, क्योंकि उनके अनुसार उन्होंने वाहन ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी नहीं की थी। इसके बाद जब उन्होंने आरटीओ कार्यालय जाकर दस्तावेजों की जांच कराई तो कथित फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोप है कि ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों में उनके दिवंगत पति के हस्ताक्षर दिखाए गए, जबकि उनके पति का निधन 1 नवंबर 2022 को हो चुका था। मृत व्यक्ति के हस्ताक्षर के आधार पर वाहन ट्रांसफर होना पूरे मामले को और भी गंभीर बना देता है।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरटीओ कार्यालय के कुछ कर्मचारियों और बाबू की मिलीभगत से यह पूरा खेल किया गया। महिला का कहना है कि बिना सत्यापन और कानूनी प्रक्रिया पूरी किए वाहन ट्रांसफर कर दिया गया। उन्होंने संबंधित बाबू समेत अन्य लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी है। साथ ही डीसीपी वेस्ट और आरटीओ अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
गरिमा दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत दर्ज कराने के बाद उन पर दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि शिकायत वापस लेने के लिए उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही हैं। इतना ही नहीं, पीड़िता का कहना है कि धमकी से जुड़ी बातचीत की रिकॉर्डिंग भी उनके पास मौजूद है, जिसे वह जांच एजेंसियों को सौंपने के लिए तैयार हैं। मामले के सामने आने के बाद आरटीओ कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी मृत व्यक्ति को कागजों में जिंदा दिखाकर वाहन ट्रांसफर किया जा सकता है, तो यह व्यवस्था में बड़े स्तर पर लापरवाही या भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। अब सभी की नजरें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और संगठित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला बन सकता है।
आरटीओ में भूत की एंट्री! मरने के बाद भी बेच गया स्कॉर्पियो