कभी मंदिरों, आयोजनों और सामाजिक कार्यक्रमों में लाखों रुपये दान देने वाले वरिष्ठ समाजसेवी अब सार्वजनिक जीवन से दूर, लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं
कानपुर शहर में अपने आपको वरिष्ठ समाजसेवी बताने वाले एक चर्चित समाजसेवी इन दिनों अचानक सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब हो गए हैं। कभी धार्मिक आयोजनों, भंडारों, सांस्कृतिक मंचों और सामाजिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचने वाले यह समाजसेवी अब लंबे समय से किसी मंच पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। शहर के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में उनकी अलग पहचान थी। सूत्रों के अनुसार वे कई कार्यक्रमों में 50 हजार से लेकर एक लाख और चार लाख रुपये तक आर्थिक सहयोग करते थे। मंदिरों में होने वाले आयोजनों में भगवान का स्वरूप धारण कर प्रस्तुति देने वाले कलाकारों, ढोल-नगाड़ा बजाने वालों, आर्केस्ट्रा टीमों, महिलाओं और बच्चों तक को खुले हाथ से धनराशि बांटते देखे जाते थे। इसी वजह से उन्हें कई लोग “दानवीर समाजसेवी” के नाम से भी जानते थे। लेकिन कुछ समय पहले उनके परिवार में बड़ा दुखद हादसा हुआ। उनकी बहू की अचानक मृत्यु हो गई। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद से समाजसेवी पूरी तरह बदल गए हैं। उन्होंने सार्वजनिक कार्यक्रमों में जाना लगभग बंद कर दिया है और पहले की तरह धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय नहीं दिखाई दे रहे।सूत्रों की मानें तो इस व्यक्तिगत त्रासदी ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया है। शहर के सामाजिक गलियारों में चर्चा है कि इस घटना के बाद उनका भगवान और धार्मिक गतिविधियों से विश्वास भी कमजोर पड़ गया है। हालांकि इस संबंध में समाजसेवी या उनके परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कई आयोजकों का कहना है कि पहले जहां किसी भी बड़े कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी लगभग तय मानी जाती थी, वहीं अब वे निमंत्रण मिलने के बावजूद कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो रहे। शहर में इस बदलाव को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे गहरे पारिवारिक दुख का असर मान रहे हैं तो कुछ इसे जीवन और आस्था से जुड़ा बड़ा मानसिक झटका बता रहे हैं।
फिलहाल शहर में यही चर्चा है कि क्या कभी मंचों की शान रहे यह समाजसेवी फिर से सार्वजनिक जीवन में वापसी करेंगे, या निजी दुख ने उन्हें हमेशा के लिए भीड़ और मंचों से दूर कर दिया है।