हैलट की 24 घंटे वाली पैथोलॉजी में महिला शौचालय पर ताला, मरीजों में नाराजगी

कानपुर:
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध लाला लाजपत राय चिकित्सालय (हैलट) में अव्यवस्थाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला अस्पताल की 24 घंटे संचालित होने वाली केंद्रीय पैथोलॉजी का है, जहां पिछले कई महीनों से महिला शौचालय पर ताला लटका हुआ है। इस कारण जांच कराने आने वाली महिला मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद अस्पताल प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा।
हैलट अस्पताल की केंद्रीय पैथोलॉजी में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज जांच कराने पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की भी होती है। लेकिन महिला शौचालय बंद होने के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में कई महिलाओं को पुरुष शौचालय का उपयोग करना पड़ रहा है, जो उनके लिए बेहद असहज और अपमानजनक स्थिति बन चुकी है। महिलाओं का कहना है कि यह न केवल सुविधा का मामला है, बल्कि उनकी सुरक्षा और निजता से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
अस्पताल पहुंची कई महिला तीमारदारों ने बताया कि शौचालय पर महीनों से ताला लगा है, लेकिन अब तक इसे खुलवाने के लिए कोई पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि जब भी इस संबंध में कर्मचारियों से शिकायत की जाती है, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कई महिलाओं ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि पैथोलॉजी कर्मचारियों ने भी इस मामले में अनभिज्ञता जताई। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम कि शौचालय पर ताला किसने लगाया और इसे क्यों बंद रखा गया है। वहीं, इतने लंबे समय से शौचालय बंद होने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा निरीक्षण या कार्रवाई न किया जाना व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
जांच कराने आई एक महिला तीमारदार ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार लगातार स्वच्छता और नारी सम्मान की बात करती है, लेकिन शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद यदि शौचालय जाने की जरूरत पड़े और वहां ताला लटका मिले, तो महिलाओं को शर्मिंदगी और परेशानी दोनों झेलनी पड़ती हैं।
महिलाओं का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को इस समस्या का तत्काल समाधान करना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि समय रहते इस ओर ध्यान दिया गया होता, तो मरीजों और तीमारदारों को इतनी परेशानी नहीं उठानी पड़ती। लगातार बढ़ रही शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन महिला शौचालय को चालू कराने के लिए कोई ठोस कदम उठाता है या फिर महिला मरीजों और तीमारदारों को इसी तरह असुविधा और अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ता रहेगा।

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