संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर
कानपुर के कोऑपरेटिव इस्टेट सभागार में चेयरमैन विजय कपूर की अध्यक्षता में उद्यमियों की एक महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें देश की वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों, विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति और संसाधनों के संतुलित उपयोग जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। गोष्ठी में उपस्थित उद्यमियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशहित में दिए गए संदेशों और सुझावों का समर्थन करते हुए उन्हें वर्तमान समय की आवश्यकता बताया।
बैठक के दौरान कहा गया कि किसी भी देश की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार उसका विदेशी मुद्रा भंडार होता है। वर्तमान समय में वैश्विक स्तर पर युद्ध और आर्थिक अस्थिरता के चलते कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे समय में भारत को भी अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के लिए संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना होगा।
चेयरमैन विजय कपूर ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में स्वर्ण और क्रूड ऑयल का आयात काफी अधिक है, जबकि निर्यात की तुलना में आयात बढ़ने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से स्वर्ण खरीद में संयम बरतने, अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने, पेट्रोल-डीजल और खाद्य तेल की खपत कम करने तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग का जो आवाहन किया गया है, वह पूरी तरह राष्ट्रहित में है।
उन्होंने कहा कि यदि देश के नागरिक और उद्योगपति एक वर्ष तक अनावश्यक स्वर्ण खरीद से बचें और आयातित वस्तुओं के उपयोग को सीमित करें तो इससे विदेशी मुद्रा भंडार को संतुलित बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह समय व्यक्तिगत सुविधा से अधिक राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का है।
गोष्ठी में उद्यमियों ने करतलध्वनि के साथ प्रधानमंत्री के विचारों का समर्थन किया और कहा कि उद्योग जगत देशहित में हर संभव योगदान देने के लिए तैयार है। वक्ताओं ने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि ऊर्जा संरक्षण और संसाधनों के सीमित उपयोग को केवल सरकारी अभियान न मानकर जन आंदोलन बनाया जाए।
विजय कपूर ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। साथ ही सार्वजनिक और सामूहिक यातायात के प्रयोग को बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग छोटी-छोटी दूरी के लिए निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन या साइकिल का उपयोग करें तो इससे ईंधन की भारी बचत हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह पिछले कई वर्षों से प्रशासन से यह मांग करते आ रहे हैं कि कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों के लिए विद्यालय जाने हेतु साइकिल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाए। इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की बचत होगी बल्कि छात्रों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक पहचान रही साइकिल उद्योग को भी इससे नई ऊर्जा और पहचान मिल सकती है, क्योंकि वर्तमान समय में यह उद्योग लगातार कमजोर होता जा रहा है।
बैठक में यह भी कहा गया कि देशहित में केवल आम नागरिकों और उद्योगपतियों से अपेक्षा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को भी संसाधनों के मितव्ययी उपयोग का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि जब शासन और प्रशासन के स्तर पर सादगी और जिम्मेदारी दिखाई देगी तभी जनता के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचेगा।
गोष्ठी में मौजूद उद्यमियों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे देश की आर्थिक मजबूती और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए ऊर्जा संरक्षण, सीमित संसाधन उपयोग और मितव्ययिता को अपने जीवन और उद्योगों में अपनाने का प्रयास करेंगे।
इस अवसर पर बलराम नरूला, संदीप मल्होत्रा, आर.पी. सिंह, ओ.पी. सिंह, श्यामलाल मूलचंदानी, नरेश पंजाबी, दिनेश कुशवाहा, सुशील मोहन टकरू, पम्मी खन्ना, प्रवीन विज दरोगा, अरविंदर सिंह भाटिया, अर्जुन नंदा, वीरू विश्वकर्मा, संजीव कपूर, अर्पित अवस्थी, प्रदीप माहेश्वरी, शरद शर्मा, अवध पाल, इंदरपाल सिंह टोनी, राजेंद्र गुप्ता, मयंक विज, अनूप कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में उद्यमी उपस्थित रहे।