कानपुर नगर में आगामी मानसून सीजन और संभावित बाढ़ एवं जलभराव की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। मंगलवार को सरसैयाघाट स्थित नवीन सभागार में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय बाढ़ स्टीयरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को समय रहते सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी करने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी विभाग अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करें और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सूची अपडेट की जाए और वहां राहत कार्यों की तैयारियां पहले से पूरी कर ली जाएं। डीएम ने नाव मालिकों, नाविकों और गोताखोरों की सूची तत्काल तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही गोताखोरों के मोबाइल नंबर भी सुरक्षित रखने को कहा गया ताकि आपात स्थिति में तत्काल संपर्क स्थापित किया जा सके।
बैठक में पशुपालन विभाग को निर्देश दिए गए कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए टीकाकरण, दवाओं और चारे की पर्याप्त व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। वहीं स्वास्थ्य विभाग को एंटी स्नेक वेनम समेत सभी जरूरी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए गए। डीएम ने कहा कि बरसात के दौरान सांप काटने और जलजनित बीमारियों की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह सक्रिय रहनी चाहिए।
नगर निगम और संबंधित विभागों को शहर के सभी प्रमुख नालों और जल निकासी मार्गों की समय से सफाई कराने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या न हो, इसके लिए पानी की निकासी निर्बाध रहनी चाहिए। उन्होंने सभी विभागों को माइक्रो प्लान तैयार करने और संवेदनशील क्षेत्रों की विशेष निगरानी करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि जनपद में गंगा, यमुना, रिन्द, पांडु, नून और ईशन नदियां प्रवाहित होती हैं। गंगा नदी का प्रवाह जनपद में लगभग 114 किलोमीटर तक है, जबकि यमुना नदी करीब 50 किलोमीटर क्षेत्र में बहती है। पिछले वर्षों में चारों तहसीलों के लगभग 175 गांव बाढ़ से प्रभावित रहे हैं। इनमें घाटमपुर के 58, सदर के 54, बिल्हौर के 51 और नरवल तहसील के 12 गांव शामिल हैं।
प्रशासन की ओर से इस वर्ष कुल 36 बाढ़ चौकियां स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इनमें सदर तहसील में 8, घाटमपुर में 16, नरवल में 3 और बिल्हौर में 9 बाढ़ चौकियां स्थापित की जाएंगी। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी चौकियों पर प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, मेडिकल किट, सर्च लाइट और अन्य जरूरी संसाधन पहले से उपलब्ध कराए जाएं।
अधिशासी अभियंता बाढ़ नियंत्रण विभाग ने बैठक में बताया कि राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 149 नावें तैनात की जाएंगी। इस पर जिलाधिकारी ने जरूरत के अनुसार नावों की संख्या और बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने तटबंधों और रेगुलेटरों की मरम्मत, नालों की सफाई तथा मॉक ड्रिल समय से कराने पर विशेष जोर दिया।
डीएम ने यह भी कहा कि मानसून के दौरान कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है। ऐसे में संवेदनशील गांवों में वैकल्पिक विद्युत व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए ताकि आम लोगों को परेशानी न उठानी पड़े। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में एम्बुलेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करने और राहत टीमों को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में एडीएम वित्त एवं राजस्व डॉ. विवेक चतुर्वेदी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम सदर अनुभव सिंह, एसडीएम घाटमपुर अबिचल प्रताप सिंह, एसडीएम नरवल विवेक कुमार मिश्रा, डीपीआरओ मनोज कुमार, डीएसओ राकेश कुमार सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
मानसून से पहले अलर्ट मोड में प्रशासन, तैयारियों की डीएम ने की समीक्षा