नई व्यवस्था से हर वाहन की लोकेशन होगी दर्ज, खरीद-बिक्री का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
वाहनों की जियो टैगिंग अनिवार्य, कर चोरी पर लगेगी लगाम | व्यापारियों ने उठाए व्यवहारिकता और नेटवर्क को लेकर सवाल
कानपुर। उत्तर प्रदेश की सरकारी मंडियों में आने वाले अनाज और कृषि उत्पादों की आवाजाही अब पूरी तरह निगरानी में होगी। प्रदेश सरकार मंडियों में पहुंचने वाली हर गाड़ी की जियो टैगिंग अनिवार्य करने जा रही है। नई व्यवस्था अगले माह से लागू किए जाने की तैयारी है, जिसके तहत यह आसानी से पता चल सकेगा कि मंडी में आने वाला अनाज या कृषि उत्पाद किस जिले या मंडी क्षेत्र से आया है।
इस नई व्यवस्था के तहत “यूपी व्हीकल मंडी टैगिंग एप” के जरिए वाहनों की ट्रैकिंग की जाएगी। मंडी समिति के अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है। एप में यह प्रावधान किया गया है कि जब कोई वाहन एक मंडी से दूसरी मंडी में माल लेकर जाएगा, तो उसे गेट पास जारी करने से पहले जियो टैग कराना होगा। वहीं, दूसरे राज्यों से आने वाले माल को “प्री-अराइवल” श्रेणी में पहले से जियो टैग करना अनिवार्य होगा।
इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य मंडियों में होने वाली खरीद-बिक्री का ई-विवरण तैयार करना है। इसके जरिए सरकार को यह जानकारी मिलेगी कि किस मंडी में कितना और किस क्षेत्र से माल आ रहा है। साथ ही, व्यापारियों की पहचान सुनिश्चित होगी और कर चोरी की जांच में भी मदद मिलेगी। सरकार को संबंधित मंडियों की जरूरत के अनुसार सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी यह डेटा उपयोगी साबित होगा।
वर्तमान में मंडी समितियों में व्यापारियों को प्रपत्र 9आर, 6आर और गेट पास जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। दूसरे राज्यों से आने वाले गल्ला, दलहन, तिलहन, किराना और गुड़ पर प्री-अराइवल पर्ची जारी की जाती है, जो पहले से ही ऑनलाइन है। अब इस पूरी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए जियो टैगिंग को जोड़ा जा रहा है।
हालांकि, इस नई व्यवस्था को लेकर व्यापारियों और उद्यमियों के बीच चिंता भी देखी जा रही है। दाल मिल संचालक केके गुप्ता का कहना है कि यह प्रणाली व्यवहारिक नहीं है। उनके अनुसार, लोडिंग और अनलोडिंग के दौरान व्यापारियों या उनके कर्मचारियों को अपने मोबाइल में एप डाउनलोड कर हर वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करनी होगी। यदि इसमें कोई चूक होती है तो संबंधित स्टॉक जमा नहीं हो पाएगा और न ही गेट पास जारी किया जा सकेगा, जिससे व्यापार प्रभावित हो सकता है।
भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने भी आशंका जताई है कि नई व्यवस्था से व्यापारियों का उत्पीड़न बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से ही मंडी शुल्क और पेनाल्टी का प्रावधान लागू है, ऐसे में अतिरिक्त तकनीकी प्रक्रियाएं व्यापार को और जटिल बना सकती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अधिकांश व्यापारी खुद मौजूद नहीं रहते और उनके कर्मचारी कार्य संभालते हैं। यदि जियो टैगिंग में किसी प्रकार की लापरवाही होती है, तो नुकसान सीधे व्यापारी या फर्म को उठाना पड़ेगा।
इसके अलावा, प्रदेश की लगभग 220 मंडियों में से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां नेटवर्क की समस्या आम है। ऐसे में एप के सुचारु संचालन में बाधा आ सकती है। व्यापारियों का कहना है कि इन व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किए बिना इस व्यवस्था को लागू करना मुश्किल होगा।
वहीं, मंडी सचिव वीजिन बालियान का कहना है कि नई प्रणाली को लागू करने के लिए कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। उनके अनुसार, जियो टैगिंग लागू होने से मंडी परिसर में वाहनों का आवागमन अधिक सुव्यवस्थित होगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।
अब देखना होगा कि सरकार इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले व्यापारियों की आशंकाओं का किस तरह समाधान करती है, ताकि पारदर्शिता के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित न हों।