कलश यात्रा से शुरू हुआ भव्य आयोजन, प्रवचनों में मिला धर्म, संस्कार और जीवन मूल्यों का संदेश
कानपुर। ओंकारेश्वर मंदिर इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। फेथफुलगंज कैंट स्थित इस प्राचीन मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा और राम कथा ने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया है। मंदिर परिसर में हर ओर भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि गूंज रही है और प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत 3 और 4 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा और वैदिक अनुष्ठानों के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इसके पश्चात 5 अप्रैल से श्रीमद् भागवत कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया, जो लगातार श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति करा रही है।
कथा प्रवक्ता के रूप में वृंदावन धाम से पधारे प्रशांत भूषण जी महाराज अपने ओजस्वी प्रवचनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर रहे हैं। उन्होंने कथा के दौरान कहा कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य ईश्वर भक्ति और सत्संग के माध्यम से आत्मा का कल्याण करना है। उन्होंने यह भी बताया कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में लोग भौतिक सुखों के पीछे भाग रहे हैं, जबकि सच्चा सुख प्रभु स्मरण और धर्म के मार्ग पर चलने में ही निहित है।
महाराज जी ने श्रीमद् भागवत और राम कथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से मर्यादा, सत्य, प्रेम और सेवा के महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से नशे और बुरी संगत से दूर रहने, माता-पिता का सम्मान करने और भारतीय संस्कृति को अपनाने का आह्वान किया।
इस धार्मिक आयोजन के मुख्य आयोजक कपिलाचार्य महाराज हैं, जिनके नेतृत्व में पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन किया जा रहा है। आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए समुचित व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे दूर-दूर से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
प्रतिदिन कथा के साथ-साथ भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय कलाकारों और भक्तों की प्रस्तुतियां लोगों को मंत्रमुग्ध कर रही हैं। मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों का तांता लगा रहता है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
आयोजकों ने अधिक से अधिक लोगों से इस पावन आयोजन में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को सुदृढ़ कर रहा है, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नैतिक मूल्यों का भी संचार कर रहा है।
ओंकारेश्वर मंदिर में चल रहा यह भव्य आयोजन श्रद्धा, संस्कृति और आध्यात्मिक जागरण का अद्भुत संगम बन गया है।