कानपुर। पुलिस कमिश्नरेट में बुधवार का दिन खाकी के सम्मान और गौरव के नाम रहा। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को वर्षों तक अपनी सूझबूझ और कड़ी मेहनत से संभालने वाले तीन अनुभवी निरीक्षकों—मनोज कुमार सिंह, सुभाष चन्द्र और रवीन्द्र प्रताप सिंह—को सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) पद पर पदोन्नत किया गया। इस मौके पर पुलिस आयुक्त कार्यालय स्थित सभागार में भव्य ‘पिपिंग सेरेमनी’ का आयोजन किया गया, जहां अधिकारियों के कंधों पर नए सितारे सजाए गए।
समारोह के दौरान पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) दिनेश त्रिपाठी ने पदोन्नत अधिकारियों के कंधों पर स्टार लगाकर उन्हें नई जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाएं दीं। जैसे ही तीनों अधिकारियों के कंधों पर पदोन्नति के सितारे सजे, पूरा सभागार तालियों की गूंज से गूंज उठा और मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनका उत्साहवर्धन किया।
पदोन्नत हुए तीनों अधिकारी लंबे समय से ट्रैफिक विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे थे और उन्होंने शहर की जटिल यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भीड़भाड़ वाले चौराहों, व्यस्त बाजारों और प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या से निपटने में उनकी कार्यशैली और अनुभव की सराहना की जाती रही है। यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के साथ ही उन्होंने जनजागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक करने में भी अहम योगदान दिया।
अब पदोन्नति के बाद ये अधिकारी केवल ट्रैफिक प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण जैसी बड़ी जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जल्द ही तीनों अधिकारियों को नई तैनाती दी जाएगी, जहां वे शहर या जनपद के विभिन्न सर्कलों का प्रभार संभाल सकते हैं।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने इस अवसर पर कहा कि पदोन्नति केवल सम्मान नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों का विस्तार है। उन्होंने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि ये सभी अधिकारी अपने नए दायित्वों को पूरी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और पेशेवर दक्षता के साथ निभाते हुए पुलिसिंग व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि अनुभवी अधिकारियों के नेतृत्व में कानून-व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा आम जनता को बेहतर सुरक्षा और सेवाएं मिलेंगी। शहरवासियों को भी इन अधिकारियों से बेहतर पुलिसिंग और सुगम यातायात व्यवस्था की उम्मीद है।
तीन इंस्पेक्टर बने एसीपी