कानपुर। विश्व ग्लूकोमा दिवस (12 मार्च) तथा 10 से 16 मार्च तक मनाए जा रहे वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक के अवसर पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर द्वारा परेड स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को आंखों की गंभीर बीमारी ग्लूकोमा (काला मोतिया) के प्रति जागरूक करना था।
पत्रकार वार्ता को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, सचिव प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन, वैज्ञानिक सचिव डॉ. शरद बाजपेयी, वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ एवं निदेशक कनिका हॉस्पिटल कानपुर तथा डॉ. रुचिका अग्रवाल, प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, रामा मेडिकल कॉलेज ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने पत्रकारों का स्वागत करते हुए बताया कि ग्लूकोमा एक गंभीर नेत्र रोग है, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रहा है। पहले यह बीमारी अधिकतर वृद्धावस्था में देखी जाती थी, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद आम लोगों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता की कमी है। इसी उद्देश्य से वर्ल्ड ग्लूकोमा वीक के दौरान जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
आईएमए कानपुर की सचिव प्रोफेसर डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि राष्ट्रीय ग्लूकोमा सोसाइटी और राष्ट्रीय आईएमए के सहयोग से देशभर में इस अभियान के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आंखों की नसों और आंखों के प्रेशर की जांच किसी भी नेत्र विशेषज्ञ के यहां आसानी से कराई जा सकती है, जिससे समय रहते ग्लूकोमा का पता लगाया जा सकता है और अंधता से बचाव संभव है।
वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद बाजपेयी ने बताया कि जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, शुगर या थायरॉइड जैसी बीमारियां हैं या जो लंबे समय से स्टेरॉइड का सेवन कर रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से ग्लूकोमा की जांच करानी चाहिए। उन्होंने बताया कि कई बार यह बीमारी परिवारों में भी पाई जाती है, इसलिए यदि परिवार में किसी को ग्लूकोमा है तो अन्य सदस्यों को भी अपनी आंखों की जांच अवश्य करानी चाहिए।
डॉ. रुचिका अग्रवाल ने बताया कि ग्लूकोमा सप्ताह के दौरान विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इस अभियान का संदेश पहुंच सके। उन्होंने लोगों से अपील की कि परिवार में किसी को ग्लूकोमा होने पर अन्य सदस्य भी सतर्क रहें और नियमित नेत्र जांच कराते रहें।
आईएमए कानपुर के वैज्ञानिक सचिव डॉ. दीपक श्रीवास्तव ने कहा कि ग्लूकोमा आज भी अंधता के प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि समय-समय पर आंखों की जांच कराते रहें और किसी भी समस्या के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लें।