15 साल पुराने मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत, सत्र न्यायालय से मिली बड़ी राहत

कानपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश दुबे को कथित रंगदारी के एक पुराने मामले में सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। एडीजे सपना त्रिपाठी की अदालत ने मामले की परिस्थितियों, उपलब्ध तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद अधिवक्ता दुबे को जमानत प्रदान कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद उनके समर्थकों और अधिवक्ताओं के बीच खुशी का माहौल देखा गया। यह मामला प्रज्ञा त्रिवेदी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें वर्ष 2011 की एक कथित घटना का उल्लेख किया गया था। लगभग 15 वर्ष पुराने इस प्रकरण में लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। हाल ही में मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने कई महत्वपूर्ण तथ्यों को अदालत के समक्ष रखा, जिन पर विचार करने के बाद न्यायालय ने अधिवक्ता अखिलेश दुबे को जमानत देने का निर्णय लिया।
बचाव पक्ष की ओर से अदालत में यह प्रमुख दलील दी गई कि वर्ष 2011 में जब इस मामले की मूल एफआईआर दर्ज हुई थी, उस समय अधिवक्ता अखिलेश दुबे का नाम आरोपियों की सूची में शामिल ही नहीं था। यानी शुरुआती जांच और प्राथमिकी में उनका कोई प्रत्यक्ष उल्लेख नहीं किया गया था।
इसके अलावा अदालत को यह भी बताया गया कि सितंबर 2025 में दाखिल की गई प्रोटेस्ट पिटीशन में भी अधिवक्ता दुबे का नाम सामने नहीं आया था। बचाव पक्ष का कहना था कि जांच के काफी समय बाद अचानक उनका नाम इस प्रकरण में जोड़ा गया, जबकि उनके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य या प्रत्यक्ष प्रमाण प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
कानूनी सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान अधिवक्ता दुबे को आरोपी बनाए जाने को लेकर भी कई सवाल उठाए गए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि बिना पर्याप्त साक्ष्य के उनका नाम प्रकरण में जोड़ा जाना न्यायसंगत नहीं है। अदालत ने इन सभी तथ्यों और दलीलों पर गंभीरता से विचार करने के बाद उन्हें जमानत देने का आदेश दिया।
गौरतलब है कि अगस्त 2025 में अधिवक्ता अखिलेश दुबे के खिलाफ कानूनी घेराबंदी अचानक तेज हो गई थी। 6 अगस्त से 13 अगस्त 2025 के बीच मात्र एक सप्ताह के भीतर उनके खिलाफ पांच अलग-अलग एफआईआर दर्ज कराई गई थीं, जिससे कानूनी जगत में भी काफी चर्चा रही।
करीब 40 वर्षों से वकालत के पेशे से जुड़े अखिलेश दुबे शहर के चर्चित और वरिष्ठ अधिवक्ताओं में गिने जाते हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि वह लंबे समय से विधि क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं और कई महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी कर चुके हैं।
अब तक उनके खिलाफ दर्ज मामलों में से चार में उन्हें अदालतों से राहत मिल चुकी है। ताजा फैसले के बाद उनके समर्थकों और सहयोगी अधिवक्ताओं ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताते हुए संतोष व्यक्त किया है। कानूनी जानकारों का मानना है कि अदालत का यह निर्णय मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद