केसीएएस सीपीई स्टडी सर्कल का महत्वपूर्ण सेमिनार संपन्न

कानपुर। केसीएएस सीपीई स्टडी सर्कल द्वारा शहर के एक रेस्टोरेंट में एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय “आयकर अधिनियम 2025 के तहत व्यवसाय एवं पेशे से होने वाले लाभ-हानि में हुए बदलाव तथा असेसमेंट प्रोसीडिंग्स से जुड़े प्रमुख मुद्दे” रहा। इसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (सीए) और अन्य प्रोफेशनल्स ने बड़ी संख्या में सहभागिता की।
सेमिनार में सीए गोविंद माहेश्वरी ने आयकर अधिनियम 2025 के अंतर्गत व्यवसाय एवं पेशे से होने वाले लाभ-हानि में किए गए बदलावों पर विस्तार से प्रकाश डाला, जबकि सीए विवेक खन्ना ने आकलन (असेसमेंट) कार्यवाही से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं। सत्र का कुशल संचालन कन्वीनर सीए प्रशांत रस्तोगी ने किया। डिप्टी कन्वीनर सीए नितिन सिंह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
सत्र की अध्यक्षता करते हुए सीए गोविंद कृष्णा ने कहा कि इनकम टैक्स एक्ट 2025 का सबसे बड़ा योगदान व्यवसाय, पेशे और आकलन प्रक्रिया—दोनों क्षेत्रों में स्पष्टता और सरलता लाना है। उन्होंने बताया कि व्यवसाय एवं पेशे से आय से जुड़े पुराने बिखरे हुए प्रावधानों को अब धारा 26 से 66 तक एक क्रमबद्ध ढांचे में रखा गया है, जिससे अनुपालन पहले की तुलना में अधिक सरल हो गया है।
उन्होंने आगे बताया कि डीम्ड प्रॉफिट, रिकवरी, राइट-डाउन वैल्यू (WDV) का अंतर और विशेष परिस्थितियों में माने जाने वाले लाभ को एकीकृत कर दिया गया है, जिससे व्याख्या संबंधी भ्रम समाप्त हुआ है। री-असेसमेंट प्रक्रिया पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब विभाग सीधे नोटिस जारी नहीं कर सकता; पहले करदाता को सूचना देना और जवाब का अवसर देना अनिवार्य होगा। समय-सीमा, अनुमोदन और निर्धारित प्रक्रिया का पालन आवश्यक किया गया है। सेमिनार में सीए गोविंद माहेश्वरी ने स्पष्ट किया कि नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 में व्यवसाय एवं पेशे से आय के प्रावधानों को मूल रूप से बदला नहीं गया, बल्कि उन्हें पुनर्गठित, सरलीकृत और सीक्वेंशियल तरीके से व्यवस्थित किया गया है। पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में जहां ये प्रावधान धारा 28 से 44DB तक अलग-अलग बिखरे हुए थे, वहीं नए कानून में इन्हें 26 से 66 तक एक सुव्यवस्थित क्रम में रखा गया है।
वहीं सीए विवेक खन्ना ने बताया कि री-असेसमेंट वह प्रक्रिया है जिसमें पूर्ण हो चुके मूल्यांकन को दोबारा खोला जाता है, जब विभाग को यह विश्वास हो कि कर योग्य आय का कोई हिस्सा छूट गया है। नई व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाई गई है और करदाता के अधिकारों को अधिक सुरक्षित किया गया है—अब अधिकारी पहले पूरी जानकारी साझा करेगा और करदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
इस सेमिनार में प्रमुख रूप से सीए राजीव गुप्ता, सीए अरविंद नाथ सिंह, सीए आयुष गुप्ता, सीए अंकित अग्रवाल, सीए शाश्वत गुप्ता, एन.डी. मनियार, विष्णु माहेश्वरी, विवेक अवस्थी, प्रमोद सक्सेना, नितिन द्विवेदी सहित अनेक प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स एवं प्रोफेशनल्स उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नमस्कार,J news India में आपका हार्दिक अभिनंदन हैं, यहां आपकों 24×7 के तर्ज पर पल-पल की अपडेट खबरों की जानकारी से रूबरू कराया जाएगा,खबर और विज्ञापन के लिए संपर्क करें- +91 9044953076,हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें साथ ही फेसबुक पेज को लाइक अवश्य करें।धन्यवाद