कानपुर।
भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों में बढ़ते जातीय भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और छात्र आत्महत्याओं की गंभीर घटनाओं को लेकर अपनी जनता पार्टी ने यूजीसी एक्ट–2026 के समर्थन में सख्त रुख अपनाया है। पार्टी पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपते हुए इस विधेयक के प्रभावी और त्वरित क्रियान्वयन की मांग की। पार्टी ने यूजीसी एक्ट–2026 को देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और संविधान सम्मत बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।
ज्ञापन सौंपते समय अपनी जनता पार्टी के ग्रामीण जिलाध्यक्ष रामराज मौर्य ने कहा कि यूजीसी एक्ट–2026 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 17, 18, 21 एवं 21-क के तहत समानता, सम्मान, गरिमा और शिक्षा के अधिकार को और अधिक मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि यह कानून उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त भेदभाव को समाप्त कर छात्रों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।
पार्टी ने स्पष्ट किया कि यूजीसी एक्ट–2026 का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति, नस्ल, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर होने वाले किसी भी प्रकार के भेदभाव को जड़ से खत्म करना है, ताकि भविष्य में रोहित वेमूला, डॉ. पायल तडवी और दर्शन सोलंकी जैसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। पार्टी नेताओं ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त अदृश्य हिंसा और संस्थागत भेदभाव छात्रों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है, जिसका परिणाम आत्महत्या जैसी घटनाओं के रूप में सामने आ रहा है।
विधेयक की आवश्यकता पर जोर देते हुए अपनी जनता पार्टी ने चिंताजनक आंकड़े भी प्रस्तुत किए। पार्टी के अनुसार विभिन्न आईआईटी संस्थानों में अब तक लगभग 27 से 30 छात्रों की आत्महत्याओं के मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें आईआईटी कानपुर में हाल के वर्षों में सर्वाधिक 9 मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा 20 जनवरी 2026 को आईआईटी कानपुर तथा 4 फरवरी 2026 को आईआईटी बॉम्बे में भी आत्महत्या के नए मामले सामने आए हैं।
राज्यसभा में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए पार्टी ने बताया कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 98 आत्महत्याएं हुईं, जिनमें 39 आईआईटी, 25 एनआईटी और 25 केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संबंधित थीं। पार्टी ने यह भी रेखांकित किया कि आत्महत्या करने वाले छात्रों में बड़ी संख्या एससी-एसटी एवं अल्पसंख्यक वर्ग के छात्रों की है। एनसीआरबी के वर्ष 2023 के आंकड़ों के अनुसार देश में छात्र आत्महत्याओं की संख्या 13,892 के अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है।
इस अवसर पर अपनी जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं मंत्री भगवती सागर ने यूजीसी विधेयक 2026 का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून न केवल शैक्षणिक संस्थानों की जवाबदेही तय करेगा, बल्कि शिक्षा के मानकों का एकीकरण कर विद्यार्थियों के अधिकारों और हितों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा में समानता और न्याय स्थापित करने के लिए यूजीसी एक्ट–2026 का सख्ती से लागू होना अत्यंत आवश्यक है।
अपनी जनता पार्टी ने राष्ट्रपति से अपील की कि देश और छात्रहित को सर्वोपरि रखते हुए इस विधेयक को बिना किसी देरी के प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। पार्टी का मानना है कि इस कानून के कड़ाई से पालन से ही शिक्षण संस्थानों में व्याप्त भेदभाव, उत्पीड़न और अदृश्य हिंसा का अंत संभव हो सकेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमुख रूप से पूर्व विधायक एवं मंत्री भगवती सागर, ग्रामीण जिलाध्यक्ष रामराज मौर्य, दीपू कुशवाहा, अवधेश कुशवाहा, प्रशांत मौर्य (नगर जिलाध्यक्ष) सहित सैकड़ों कार्यकर्ता एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे।
यूजीसी एक्ट के समर्थन में ज्ञापन