प्रशासन की चुप्पी पर सवाल, छोटे पाउच पर 1 से 5 रुपये तक अतिरिक्त वसूली का आरोप
कानपुर — औद्योगिक नगरी कानपुर में इन दिनों पान मसाला और गुटखा उपभोक्ताओं की जेब पर खुलेआम डाका डाले जाने का आरोप सोशल मीडिया पर जोर पकड़ रहा है। जनपद के विभिन्न इलाकों में निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर पान मसाला बेचे जाने के मामले को लेकर उपभोक्ताओं में भारी नाराजगी है।
ट्विटर (X) और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर लगातार शिकायतें वायरल हो रही हैं, जिनमें आरोप लगाया जा रहा है कि ₹1, ₹2 और ₹5 प्रिंट रेट वाले पाउच 1 से 5 रुपये तक महंगे बेचे जा रहे हैं। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों की दुकानों तक यह स्थिति बनी हुई है। उपभोक्ताओं का दावा है कि थोक विक्रेताओं से लेकर फुटकर दुकानदार तक एक तरह के “सिंडिकेट” के रूप में काम कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता तब और बढ़ जाती है जब जागरूक ग्राहक एमआरपी से अधिक दाम देने का विरोध करते हैं। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि मूल्य पूछने या पैकेट पर अंकित कीमत दिखाने पर दुकानदार सामान देने से ही मना कर देते हैं। कुछ इलाकों में ग्राहकों और दुकानदारों के बीच तीखी नोकझोंक की घटनाएं भी सामने आई हैं।
विधिक माप विज्ञान (बाट-माप विभाग) और खाद्य सुरक्षा विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी वस्तु को एमआरपी से अधिक कीमत पर बेचना दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद शहर में यह कथित कालाबाजारी बेरोकटोक जारी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि थोक मंडियों से ही कृत्रिम किल्लत दिखाकर माल महंगे दामों पर निकाला जा रहा है और फुटकर दुकानदार “ऊपर से महंगा मिलने” का बहाना बनाकर अतिरिक्त वसूली कर रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया पर मामला लगातार सुर्खियों में रहने के बावजूद अब तक जिला प्रशासन या संबंधित विभागों की ओर से न तो कोई औचक निरीक्षण हुआ है और न ही कोई आधिकारिक बयान सामने आया है। प्रशासन की इस चुप्पी से व्यापारियों के हौसले बुलंद बताए जा रहे हैं।
आम जनता में बढ़ते आक्रोश के बीच लोग जिलाधिकारी और संबंधित विभागों से मांग कर रहे हैं कि दोषी दुकानों और गोदामों पर छापेमारी की जाए, अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएं।