कानपुर— कानपुर में गुरुवार को बैंकों की देशव्यापी हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय श्रम संगठनों के आह्वान पर केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों के विरोध में बैंक कर्मी सड़कों पर उतर आए, जिससे औद्योगिक नगरी की बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। यूपी बैंक एम्पलाइज यूनियन के नेतृत्व में नगर की 11 सरकारी बैंकों में ताले लटके रहे और एक ही दिन में लगभग 1600 करोड़ रुपये का बैंकिंग कारोबार पूरी तरह ठप हो गया। हड़ताल के चलते शहर के प्रमुख बाजारों और औद्योगिक क्षेत्रों में भुगतान व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। व्यापारियों को लेनदेन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, वहीं आम नागरिकों को नकदी, चेक क्लीयरिंग और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन न हो पाने से दिनभर परेशान होना पड़ा। कई स्थानों पर एटीएम खाली रहे, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
पीएनबी स्टाफ एसोसिएशन के चेयरमैन अनिल सोनकर ने बताया कि हड़ताल के कारण कानपुर में करीब 1600 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेनदेन प्रभावित हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार लगभग 360 करोड़ रुपये की चेक क्लीयरिंग ठप रही, 410 करोड़ रुपये का नकद जमा कार्य नहीं हो सका, 180 करोड़ रुपये का नकद भुगतान प्रभावित हुआ, जबकि 430 करोड़ रुपये के आरटीजीएस और नेफ्ट के जरिए होने वाले ट्रांसफर रुक गए। इसके अलावा करीब 220 करोड़ रुपये के फंड ट्रांसफर और अन्य बैंकिंग सेवाएं भी बाधित रहीं।
दिनभर बैंक कर्मचारी बैंकों के क्षेत्रीय कार्यालयों और शाखाओं के बाहर धरना-प्रदर्शन करते नजर आए। नारेबाजी और सभाओं के माध्यम से उन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ अपना आक्रोश जताया। यूपी बैंक इम्प्लाइज यूनियन के मंत्री रजनीश गुप्ता और संयुक्त मंत्री अंकुर द्विवेदी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बैंकों और बीमा क्षेत्र के निजीकरण एवं विनिवेश के विरुद्ध यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में IDBI Bank की बिक्री पर रोक, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई के निर्णय को वापस लेना, नई पेंशन योजना को रद्द कर पुरानी पेंशन बहाल करना, चार लेबर कोड और फिक्स्ड टर्म रोजगार जैसी कर्मचारी विरोधी नीतियों को वापस लेना शामिल है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
हड़ताल को सफल बनाने में मनोज तिवारी, एस.के. शुक्ला, एस.के. मिश्रा, अनुराग सिंह, अंशुमान तिवारी, नितिन शर्मा, अनिल सोनकर, अनिकेत अवस्थी, शिवम निगम, पंकज शर्मा, विनय गोयनका, अरविंद शुक्ला, बसंत लाल, पंधारी लाल वर्मा, अंकित अवस्थी, पुनीत शर्मा, तरुण कुमार, रोशूल सचान, के.एम. शुक्ला, धर्मराज पांडेय, अंकुर मिश्रा, बृजेंद्र पांडे, आर.के. मिश्र, मो. राशिद और डी.के. सती सहित बड़ी संख्या में बैंक कर्मी शामिल रहे। बैंकों में ताले लटके होने से जहां उद्योग और व्यापार जगत को भारी नुकसान उठाना पड़ा, वहीं आम जनता को भी नकदी संकट, भुगतान अटकने और जरूरी बैंकिंग कार्य न हो पाने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुल मिलाकर, इस हड़ताल ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि बैंकिंग सेवाओं के ठप होने से औद्योगिक नगरी कानपुर का जनजीवन और अर्थव्यवस्था कितनी तेजी से प्रभावित हो जाती है।