पान मसाला–तंबाकू महंगे, जीएसटी टीम अलर्ट

कानपुर। पान मसाला, तंबाकू और सिगरेट का सेवन करने वालों के लिए रविवार से झटका लग गया है। केंद्र सरकार द्वारा इन उत्पादों पर 40 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं सुरक्षा उपकर और उत्पाद शुल्क लागू किए जाने के बाद इनके दामों में 40 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी हो गई है। नई कर व्यवस्था लागू होते ही बाजार में इन उत्पादों के दाम बढ़ गए हैं, वहीं टैक्स चोरी कर सस्ता माल खपाए जाने की आशंका भी गहराने लगी है।
कर दरों में हुई इस भारी बढ़ोतरी के बाद केंद्रीय जीएसटी विभाग और उत्पाद शुल्क विभाग पर सख्त निगरानी और बड़ी कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, संभावित टैक्स चोरी को रोकने के लिए केंद्रीय जीएसटी की जांच टीमों को पहले से ही अलर्ट कर दिया गया है। आने वाले दिनों में पान मसाला, तंबाकू और सिगरेट से जुड़ी इकाइयों पर छापेमारी और भौतिक सत्यापन की कार्रवाई तेज हो सकती है।
नई व्यवस्था के तहत अब केंद्रीय जीएसटी विभाग को पान मसाला उत्पादकों से उत्पाद शुल्क भी वसूलना होगा। कानपुर शहर में पान मसाला निर्माण की एक दर्जन से अधिक इकाइयां सक्रिय हैं। अब तक कंपनियां अलग-अलग स्थानों पर उत्पादन व्यवस्था चलाती थीं, लेकिन नई कर प्रणाली में हर फैक्ट्री का अलग-अलग पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका उद्देश्य उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह नजर रखना और राजस्व चोरी पर अंकुश लगाना है।
जानकारी के अनुसार, अभी तक पान मसाला कंपनियों से प्रति मशीन लगभग 18 लाख रुपये का शुल्क सरकार द्वारा लिया जाता रहा है। अब नई व्यवस्था में मशीनों की संख्या, उनकी अधिकतम उत्पादन क्षमता और संचालन की पूरी जानकारी कंपनियों को विभाग को देनी होगी। मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की जीएसटी कमेटी के चेयरमैन संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि फैक्ट्री संचालकों को अपनी इकाइयों में लगी प्रत्येक मशीन का विवरण, उत्पादन क्षमता और संचालन की स्थिति घोषित करनी होगी।
उन्होंने बताया कि कंपनियों द्वारा जानकारी देने के 10 दिन के भीतर जीएसटी और एक्साइज विभाग की संयुक्त टीमें सभी फैक्ट्रियों का भौतिक सत्यापन करेंगी। इस दौरान मशीनों की वास्तविक संख्या, उत्पादन क्षमता और घोषित विवरण का मिलान किया जाएगा। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई गई तो संबंधित इकाई के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है, लेकिन एक फरवरी से नई कर दरें और नियम लागू हो चुके हैं। ऐसे में अब टैक्स का भुगतान भी नई दरों के अनुसार ही करना अनिवार्य होगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण काल में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कर दरों में बढ़ोतरी का असर बाजार में रविवार को ही साफ दिखाई देने लगा। घंटाघर क्षेत्र के एक थोक कारोबारी ने बताया कि कंपनियों ने एक दिन पहले से ही पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के दाम बढ़ा दिए थे। खुदरा और थोक दोनों स्तरों पर दामों में 15 से लेकर 40 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है।
अब व्यापारियों और उपभोक्ताओं की नजर सोमवार को बाजार खुलने पर टिकी है। यह साफ हो पाएगा कि कंपनियां नए प्रिंट और नई कीमत वाले पैकेट बाजार में उतारती हैं या फिर पुराने पैकेटों पर ही बढ़ा हुआ टैक्स वसूला जाएगा। फिलहाल दाम बढ़ने से उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ा है, वहीं सरकार को इससे राजस्व में बढ़ोतरी की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कर दरों में इतनी तेज़ वृद्धि से अवैध और बिना टैक्स वाले उत्पादों की सप्लाई बढ़ने का खतरा भी रहता है। ऐसे में केंद्रीय जीएसटी और एक्साइज विभाग की भूमिका और अधिक अहम हो गई है। आने वाले दिनों में शहर और आसपास के इलाकों में बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

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