कानपुर—पोषण विज्ञान, खाद्य विनियमन, कार्डियोलॉजी और ऑयल टेक्नोलॉजी के प्रमुख विशेषज्ञों ने पाम ऑयल और मानव स्वास्थ्य, पोषण एवं स्थिरता में इसकी भूमिका को लेकर विज्ञान-आधारित और संतुलित चर्चा की आवश्यकता पर जोर दिया। यह विचार हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू), कानपुर में आयोजित आधे दिन के सेमिनार “मानव स्वास्थ्य, पोषण और स्थिरता में पाम ऑयल की भूमिका: संतुलित सत्य” के दौरान सामने आए।ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग, हारकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी, कानपुर तथा ऑयल टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ओटीएआई), सेंट्रल जोन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सेमिनार में पोषण विज्ञान, चिकित्सा अनुसंधान, खाद्य विनियमन, स्थिरता और ऑयल टेक्नोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। सेमिनार का उद्देश्य पाम ऑयल से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे मिथकों को दूर करना और साक्ष्य-आधारित वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से सही जानकारी प्रस्तुत करना रहा।
वक्ताओं ने कहा कि पाम ऑयल दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेलों में से एक है और भारत की खाद्य प्रणाली में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसकी किफायती कीमत, बहुउपयोगिता और प्रोसेस्ड व पारंपरिक दोनों तरह के भोजन में इसकी उपयुक्तता इसे आम उपभोक्ताओं, होटल-रेस्टोरेंट उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए भरोसेमंद विकल्प बनाती है। पाम ऑयल की निरंतर उपलब्धता देश में खाद्य तेलों की कमी को पूरा करने में भी सहायक है, जिससे खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
सेमिनार में प्रस्तुत वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर बताया गया कि पाम ऑयल में संतृप्त और असंतृप्त फैटी एसिड का संतुलित मिश्रण होता है, जो दैनिक खाना पकाने के लिए उपयुक्त माना जाता है, विशेष रूप से जब इसे संतुलित आहार के हिस्से के रूप में उपयोग किया जाए। इसकी उच्च ऑक्सीडेटिव स्थिरता इसे तेज आंच पर पकाने की स्थितियों में अन्य कई वनस्पति तेलों की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाती है, जिससे भोजन की गुणवत्ता बनी रहती है और हानिकारक यौगिकों के बनने की संभावना कम होती है।
विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि पाम ऑयल विटामिन ई टोकोट्रिएनोल्स का एक प्राकृतिक स्रोत है, जो अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। चर्चा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वास्थ्य के लिए किसी एक खाद्य तेल को पूरी तरह त्याग देना ही समाधान नहीं है, बल्कि समग्र आहार, जीवनशैली, शारीरिक गतिविधि और उपभोग में संतुलन स्वास्थ्य पर कहीं अधिक प्रभाव डालते हैं। यह विचार-विमर्श भारत सरकार द्वारा वर्ष 2021 में शुरू किए गए “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल्स–ऑयल पाम” के उद्देश्यों के अनुरूप भी रहा। इस मिशन का लक्ष्य घरेलू खाद्य तेल उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। वक्ताओं ने ऑयल पाम फसल की दक्षता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह अन्य प्रमुख वनस्पति तेल फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर अधिक उपज देती है, जिससे यह किसानों और देश दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है। कुल मिलाकर यह सेमिनार पाम ऑयल को लेकर संतुलित, तथ्यात्मक और वैज्ञानिक समझ विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।
पाम ऑयल पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण जरूरी, मिथकों से ऊपर उठकर हो स्वास्थ्य आधारित चर्चा: विशेषज्ञ