कानपुर। शहर के पांडु नगर की निवासी और प्रख्यात पर्वतारोही दिव्या भंडोह (46) ने अपने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति के बल पर एक नया इतिहास रचने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। दिव्या अब दुनिया के सातों महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों को फतह करने के महाअभियान ‘सेवन समिट्स’ की ओर अग्रसर हैं। उनके इस ऐतिहासिक लक्ष्य और अब तक की उपलब्धियों को देखते हुए कानपुर के सांसद रमेश अवस्थी ने उन्हें खादी का तिरंगा भेंट कर सम्मानित किया और आगामी मिशन के लिए शुभकामनाओं के साथ रवाना किया।
इस अवसर पर सांसद रमेश अवस्थी ने दिव्या भंडोह की खुलकर प्रशंसा करते हुए उन्हें महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल बताया। उन्होंने कहा कि 46 वर्ष की आयु में जिस जज्बे, आत्मविश्वास और साहस के साथ दिव्या लगातार कठिन से कठिन चोटियों को फतह कर रही हैं, वह न केवल कानपुर बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। सांसद ने उनसे आग्रह किया कि वे अपने आगामी पर्वतारोहण मिशनों में इसी खादी के तिरंगे को शिखर पर फहराकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वदेशी अभियान’ को और मजबूती दें। साथ ही उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दिव्या की अगली बड़ी सफलता के बाद कानपुर में उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया जाएगा।
दिव्या भंडोह की कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और पुनर्जन्म जैसी प्रेरणा से भरी है। एक समय वह एक सफल इंटीरियर डिजाइनर थीं, लेकिन कोविड-19 महामारी के दौरान उनका व्यवसाय पूरी तरह ठप हो गया। आर्थिक कठिनाइयों और परिस्थितियों के दबाव के चलते वे गहरे तनाव और अवसाद में चली गई थीं। इसी दौर में उन्होंने खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के लिए पर्वतारोहण को अपना सहारा बनाया। वर्ष 2019 में पर्वतारोहण की ओर बढ़ाया गया उनका यह कदम आज उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिला रहा है।
दिव्या का पर्वतारोहण सफर वर्ष 2021 में उत्तराखंड के दयारा बुग्याल से शुरू हुआ और देखते ही देखते वह अंतरराष्ट्रीय शिखरों तक जा पहुंचा। उनकी अब तक की प्रमुख उपलब्धियों में वर्ष 2022 में एवरेस्ट बेस कैंप की सफल यात्रा, 2023 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो पर विजय, 2024 में यूरोप के सर्वोच्च शिखर माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराना और 2025 में नेपाल की कठिन एवं चुनौतीपूर्ण आइलैंड पीक को फतह करना शामिल है।अब दिव्या का अगला लक्ष्य दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट अकोंकागुआ (6,962 मीटर) है। इस चुनौतीपूर्ण अभियान के लिए वे पूरी तरह तैयार हैं और आत्मविश्वास से लबरेज हैं। तिरंगा प्राप्त करते समय भावुक हुईं दिव्या भंडोह ने कहा कि यह तिरंगा उनके लिए केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि कानपुर के नागरिकों का आशीर्वाद और देशवासियों का विश्वास है। उन्होंने संकल्प लिया कि वह इस तिरंगे को हर शिखर पर गर्व और सम्मान के साथ लहराएंगी।
दिव्या भंडोह की यह यात्रा यह संदेश देती है कि उम्र, परिस्थितियां और कठिनाइयां कभी भी किसी के सपनों की उड़ान को रोक नहीं सकतीं। उनका साहस आज कानपुर ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुका है।
कानपुर की बेटी दिव्या भंडोह का ‘सेवन समिट्स’ पर लक्ष्य, सांसद रमेश अवस्थी ने तिरंगा भेंट कर किया रवाना