वृंदावन।
बांग्लादेशी क्रिकेटर को आईपीएल टीम में शामिल किए जाने के विरोध को लेकर संत समाज द्वारा उठाई गई आवाज़ पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के निर्णय का देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज ने स्वागत किया है। कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) टीम से बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को बाहर किए जाने के निर्देश पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि बीसीसीआई ने करोड़ों सनातनियों की भावना का सम्मान किया है।
देवकीनंदन महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय हैं। आए दिन हिंदुओं के साथ हिंसा, महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म एवं आगजनी जैसी घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे हालात में भारत में होने वाली आईपीएल श्रृंखला में बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल करना हिंदू समाज की पीड़ा को नज़रअंदाज़ करने जैसा था।
उन्होंने कहा कि केकेआर द्वारा बांग्लादेशी खिलाड़ी को करोड़ों रुपये की बोली लगाकर टीम में शामिल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण था। इस मुद्दे को लेकर बीते सप्ताह मुंबई में कथा के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज कराया और पूरे देश में सनातन समाज से समर्थन की अपील की, जिसके बाद विभिन्न हिंदू संगठनों ने बांग्लादेशी खिलाड़ी और मैच के बहिष्कार का ऐलान किया। शनिवार को बैंगलोर में कथा से पूर्व बीसीसीआई के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सरकार और क्रिकेट बोर्ड ने समय रहते सही निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि जब तक बांग्लादेश सरकार अपने देश में हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती, तब तक सख्त संदेश दिया जाना आवश्यक है। केकेआर टीम मालिक एवं अभिनेता शाहरुख खान की चुप्पी पर नाराज़गी जताते हुए देवकीनंदन महाराज ने कहा कि यह विरोध किसी खिलाड़ी विशेष के खिलाफ नहीं था। पूर्व में भी बांग्लादेशी खिलाड़ी भारत में खेलते रहे हैं, लेकिन मौजूदा हालात में संवेदनशीलता दिखाना जरूरी था।
उन्होंने कहा कि केकेआर के पास मौका था कि वह स्वयं पहल कर पीड़ित हिंदुओं के साथ खड़ी होती, लेकिन ऐसा न कर करोड़ों सनातनियों की भावनाओं की उपेक्षा की गई।
बीसीसीआई ने सनातनियों की भावना का सम्मान किया : देवकीनंदन महाराज