निर्णायक मोड़ की आहट, कई बड़े नामों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं
पार्ट–4
कानपुर।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कथित अवैध वसूली कांड में घटनाक्रम अब तेज़ी से बदल रहा है। शुरुआती खुलासों को मामूली मानने वाले लोग अब सक्रिय हो गए हैं, क्योंकि जांच के दायरे में कई ऐसे नामों की चर्चा है, जो अब तक पूरी तरह पर्दे के पीछे थे।
सूत्रों के अनुसार, जैसे–जैसे शिकायत-पत्र के ड्राफ्ट में नए साक्ष्य जोड़े जा रहे हैं, कई संबंधित लोग अपने पुराने मोबाइल, चैट हिस्ट्री और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड हटाने में जुट गए हैं। साफ संकेत मिल रहे हैं कि यह पूरा तंत्र सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि कई स्तरों पर फैला अनौपचारिक नेटवर्क था—कुछ लोग वसूली के “मैदानी खिलाड़ी” थे तो कुछ “संरक्षण कवच” की भूमिका निभाते थे। आरोप यह भी है कि वर्षों तक बिना औपचारिक अधिकार के प्रभाव जमाने वाला प्राइवेट कर्मचारी सिर्फ एक “चेहरा” था, असली फैसले उसके पीछे मौजूद कुछ लोगों द्वारा लिए जाते थे।
आगामी शिकायत-पत्र में नेटवर्क के कामकाज, फोन रिकॉर्डिंग, संभावित लेन-देन और अचानक बढ़ी संपत्ति के दस्तावेज शामिल होने की संभावना है। बर्रा स्थित संपत्ति और कथित सरकारी बंगले पर कब्जे से जुड़े तथ्य इसमें प्रमुख आधार बन सकते हैं।
उधर, कई नर्सिंग होम संघ और पैरामेडिकल समूह भी आंतरिक मीटिंग कर रहे हैं, ताकि संभावित जांच की स्थिति में अपनी तैयारी स्पष्ट रख सकें। प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं हैं कि यदि मामला औपचारिक जांच तक बढ़ता है, तो प्राइवेट कर्मचारी के साथ कई विभागीय कर्मचारी, निरीक्षण से जुड़े अधिकारी और कुछ बाहरी लोग भी पूछताछ के दायरे में आ सकते हैं। कुछ सूत्रों का दावा है कि उच्च स्तर पर “प्रारंभिक रिपोर्ट” मंगाई गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस बीच, सीएमओ ने मामले को संज्ञान में लिया है। बताया गया कि प्राइवेट और संविदा कर्मचारियों ने उनके सामने पहुँचकर स्वयं को पूरी तरह ईमानदार बताया। प्राइवेट कर्मचारी ने अपनी विवादित संपत्ति परिवार के किसी अन्य सदस्य की बताई। लगातार बढ़ते दबाव के चलते संविदा कर्मचारी अब कानूनी राय लेने और मामले को डिप्टी सीएम तक ले जाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कथित वसूली प्रणाली की जड़ों तक पहुँचेगा या फिर अन्य मामलों की तरह धीरे-धीरे फाइलों में दफन हो जाएगा? फिलहाल संकेत यही हैं कि आने वाले दिनों में यह प्रकरण शहर के प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र में बड़ा मुद्दा बन सकता है। अगला कदम प्रशासन उठाता है या शिकायतकर्ता—इसी पर तय होगा कि यह केस निर्णायक मोड़ लेगा या एक और अनसुलझा अध्याय बनकर रह जाएगा।