कानपुर – साउथ ईस्ट एशिया में नौकरी का झांसा देकर फंसाए गए करीब 200 भारतीय युवाओं की जल्द ही स्वदेश वापसी कराई जाएगी। कानपुर की एडीसीपी क्राइम अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि इन युवाओं को फर्जी रिक्रूटमेंट एजेंसियों के माध्यम से कंबोडिया ले जाकर साइबर ठगी कराने के लिए बंधक बना लिया गया था। जांच में सामने आया है कि उन्हें ऊंचे वेतन और मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी का लालच देकर बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पासपोर्ट जब्त कर लिए गए और हथियारबंद गार्डों की निगरानी में ठगी के काम में झोंक दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश पीड़ित उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और हरियाणा के रहने वाले हैं। भारत सरकार और कंबोडियाई प्रशासन के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है, और सभी युवाओं की लोकेशन, पासपोर्ट और वीजा डिटेल्स की पुष्टि के बाद उन्हें जल्द भारत लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि साइबर गिरोह क्रिप्टो करेंसी (USDT) के जरिये ठगी की रकम को सफेद कर अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क में भेजते हैं।
पुलिस जांच में अब तक दिल्ली, कानपुर और गुरुग्राम में संचालित 12 फर्जी रिक्रूटमेंट एजेंसियों का भंडाफोड़ किया गया है, जिनके तार कंबोडिया और म्यांमार तक फैले हैं। अंजलि विश्वकर्मा ने कहा, “इन युवाओं को साइबर गुलामी से मुक्त कराने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं, और जल्द ही सभी को सुरक्षित स्वदेश लाया जाएगा।”
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