कानपुर में 2.52 करोड़ का क्रिप्टो फ्रॉड, तीन साइबर ठग गिरफ्तार

कानपुर।
कानपुर पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने शहर के एक रिटायर्ड बैंक अधिकारी को निवेश के नाम पर 2.52 करोड़ रुपये का चूना लगा दिया। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो ठगी की रकम को कंबोडिया के रास्ते देश-विरोधी एनजीओ तक पहुंचाते थे।

हनी ट्रैप के जरिए ठगी की साजिश

एडीसीपी क्राइम अंजली विश्वकर्मा ने बताया कि यह मामला नवाबगंज निवासी रिटायर्ड बैंक अधिकारी अनिल कुमार सिंह चौहान से जुड़ा है। जुलाई 2025 में उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई थी कि एक युवती इरा रेड्डी नाम से वॉट्सऐप पर उनसे संपर्क में आई और धीरे-धीरे बातचीत बढ़ाकर उन्हें क्रिप्टो करेंसी निवेश का झांसा दिया। युवती ने विश्वास जीतने के बाद उन्हें कथित निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसे ट्रांसफर करने को कहा।

धीरे-धीरे अनिल चौहान ने अपनी बचत और रिटायरमेंट फंड से करीब 2.52 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में भेज दिए। जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की, तो पता चला कि सभी वेबसाइट और ऐप बंद हो गए हैं और संपर्क करने वाले नंबर भी ब्लॉक कर दिए गए हैं।

पुलिस जांच में हुआ बड़ा खुलासा

शिकायत के बाद साइबर सेल ने जांच शुरू की और पैसे के ट्रांजेक्शन का ट्रेल खंगाला। जांच में पता चला कि यह रकम कई बैंक खातों के जरिए क्रिप्टो करेंसी में बदली गई और कंबोडिया भेजी गई। पुलिस ने इस पूरे रैकेट के भारत में काम कर रहे नेटवर्क को ट्रेस किया।

सबसे पहले लखनऊ से जोधपुर निवासी राम निवास को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर राम दिनेश विश्नोई और महेंद्र सिंह को पकड़ा गया। पूछताछ में सामने आया कि इस गिरोह के 15 से 16 सदस्य देशभर में सक्रिय हैं।

आधार कार्ड पर खाते खुलवाकर चल रहा था नेटवर्क

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी या किराए पर लिए गए आधार कार्ड से बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे को रिसीव करने के लिए किया जाता था। बाद में यह रकम तुरंत क्रिप्टो वॉलेट्स में ट्रांसफर की जाती थी, जिससे ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी।

जांच में यह भी सामने आया कि ठगी से जुड़ी रकम का एक हिस्सा कंबोडिया स्थित सर्किट नेटवर्क के जरिए भारत में सक्रिय कुछ एनजीओ के खातों में वापस भेजा जा रहा था। पुलिस के मुताबिक, ये एनजीओ देश-विरोधी गतिविधियों से जुड़ी पाई गई हैं।

करोड़ों के डिजिटल सबूत बरामद

गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने कई अहम सबूत बरामद किए हैं। इनमें लैपटॉप, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और ट्रांजेक्शन की डिजिटल रसीदें शामिल हैं। पुलिस को अब तक 1.40 करोड़ रुपये के क्रिप्टो लेनदेन के प्रमाण मिले हैं।

साइबर टीम अब यह जांच कर रही है कि शेष राशि किन-किन खातों में गई और कंबोडिया में किस नेटवर्क के पास पहुंची।

कंबोडिया कनेक्शन पर गहराई से जांच

एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा ने बताया कि आरोपियों ने पूछताछ में कबूल किया है कि वे कंबोडिया में बैठे विदेशी ठगों के संपर्क में थे। ये ठग भारत में स्थानीय एजेंटों के माध्यम से फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म तैयार करते थे और लोगों को उच्च मुनाफे का झांसा देकर ठगी करते थे।

उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह नेटवर्क कई देशों में फैला है और भारत में इसके कई स्लीपर एजेंट सक्रिय हैं। पुलिस ने मामले की जानकारी इंटरपोल और केंद्रीय एजेंसियों को भी भेजी है ताकि विदेशी कनेक्शन की कड़ी जांच हो सके।

कानपुर पुलिस की बड़ी सफलता

यह कार्रवाई कानपुर पुलिस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साइबर ठगी के मामलों में यह पहली बार है जब ठगी की रकम का संबंध देश-विरोधी तत्वों से जुड़ा पाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

एडीसीपी ने की नागरिकों से अपील

एडीसीपी ने कहा कि साइबर ठग अब नए-नए तरीकों से लोगों को फंसा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि क्रिप्टो करेंसी, ट्रेडिंग ऐप या निवेश योजनाओं में बिना सत्यापन पैसे न लगाएं और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।

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