कानपुर। राष्ट्रीय शर्करा संस्थान के पूर्व निदेशक एवं भारतीय शर्करा एवं जैव-ऊर्जा संघ के सलाहकार प्रो. नरेंद्र मोहन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें 9 से 12 फरवरी 2026 तक मोरक्को (अफ्रीका) के माराकेश शहर में आयोजित होने वाले 26वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में “चीनी उत्पादन में जल संरक्षण का महत्त्व” विषय पर सत्र की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किया गया है। इस अवसर पर प्रो. मोहन “शून्य ताजे पानी की खपत” एवं “जीरो लिक्विड डिस्चार्ज” के साथ चीनी मिलों के संचालन पर अपने द्वारा विकसित अभिनव मॉडल की प्रस्तुति देंगे। यह तकनीक उत्तर प्रदेश की कई चीनी मिलों में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।
प्रो. मोहन द्वारा विकसित यह प्रणाली अपशिष्ट जल के शुद्धिकरण के लिए जैविक, अल्ट्राफिल्ट्रेशन, रिवर्स ऑस्मोसिस और अल्ट्रा वायलेट जैसी उन्नत तकनीकों के संयोजन पर आधारित है। इस तकनीक से प्रसंस्करण में जल का पुनः उपयोग संभव होता है, जिससे ताजे पानी की खपत में भारी कमी आती है और पर्यावरणीय प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है।
प्रो. नरेंद्र मोहन को मोरक्को में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में सत्र अध्यक्षता का आमंत्रण