कानपुर—स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत “एनीमिया की पहचान, आशा का योगदान” विषय पर शनिवार को जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के ओल्ड सिपफसा हॉल में कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसमें 90 आशा बहुओं ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य एवं डीन डॉ. संजय काला और उप प्राचार्य डॉ. ऋचा गिरी के मार्गदर्शन में हुआ। एडी स्वास्थ्य डॉ. संजू अग्रवाल ने एनीमिया मुक्त भारत में आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्हें प्रोत्साहित किया। डॉ. यू.बी. सिंह ने कहा कि रोकथाम ही इलाज से बेहतर है और आशा कार्यकर्ता ही समय रहते एनीमिया की पहचान कर इसे खत्म करने में सूत्रधार हैं।
विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू गुप्ता ने बताया कि अब भी लगभग 57% गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं और भारत सरकार इसे समाप्त करने के लिए लगातार प्रयासरत है। नोडल अधिकारी डॉ. नीना गुप्ता ने एनीमिया के कारण बताए, जबकि डॉ. शैली अग्रवाल ने इसके उपचार के बारे में जानकारी दी।
कार्यक्रम का समापन सभी आशा कार्यकर्ताओं को एनीमिया मुक्त भारत बनाने की शपथ दिलाकर किया गया। इस दौरान कई वरिष्ठ चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ मौजूद रहे।