दिव्यांगों का उत्पीड़न करने पर हो सकता है पांच लाख जुर्माना, पांच वर्ष कि सजा
कानपुर। भारत सरकार ने दिव्यांगजनों को सुरक्षा, आत्मनिर्भरता प्रदान करने व समाज कि मुख्य धारा से जोड़ने के लिए दिव्यांगजन अधिनियम 2016 कानून बनाया है। दिव्यांगजनों को इसके बारे में जानकारी न होने के कारण वह इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।
दिव्यांगजनों को इस अधिनियम की जानकारी देने के लिए राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी ने आज गोष्ठी का आयोजन किया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय दिव्यांग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि दिव्यांगजन अधिनियम 2016 में दिव्यांगजनों का उत्पीड़न करने पर पांच वर्ष कि सजा व पांच लाख रुपए तक के दण्ड का प्रावधान है। पुलिस अधिकारी द्वारा रिपोर्ट न दर्ज करने पर अधिनियम की धारा 7(2) में कार्यवाही का प्रावधान है। इस अधिनियम में प्राथमिक से 12वीं कक्षा तक नि: शुल्क शिक्षा का प्रावधान है। देश में न्यायालय दिव्यांगजन आयुक्त भारत का कार्यालय नई दिल्ली व न्यायालय राज्य आयुक्त दिव्यांगजन का कार्यालय लखनऊ में बना है। जनपदों के जिलाधिकारी अपर आयुक्त दिव्यांगजन व जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी सहायक आयुक्त दिव्याजन के रूप में नामित हैं। दिव्यांगजन अपनी किसी भी प्रकार कि समस्या, शिकायत इनके कार्यालयों में कर सकते हैं। यहां पर दिव्यांगजन कि समस्याओं का समाधान होगा। न्यायालय विपक्षी को तलब कर मामले कि सुनवाई करेगा और गुण दोष के आधार पर फैसला देगा।वीरेन्द्र कुमार ने बताया कि सरकारी क्षेत्रों के अधिकारी व कर्मचारी इस कानून से अनभिज्ञ हैं जिसके कारण वो इस कानून का अनुपालन नहीं करते हैं। सरकारी व निजी क्षेत्र में इस कानून के प्रचार-प्रसार कि आवश्यकता है।
आज कि गोष्ठी में वीरेन्द्र कुमार के अलावा आनन्द तिवारी, राहुल कुमार, अल्पना कुमारी, अरविन्द सिंह, गुड्डी दीक्षित, वैभव दीक्षित, गौरव कुमार, रंजीत सिंह, गोमती वर्मा आदि मौजूद थे।