लखनऊ । अय्यामे अजा माहे मोहर्रम का चांद रविवार को दिखाई दिया। माहे मोहर्रम की पहली तारीख 27 जून को और यौमे आशूर 6 जुलाई को होगा। यह ऐलान शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास और मरकजी चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने किया है। शुक्रवार रविवार से ही कर्बला के शहीदों के गम का दौर शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही कर्बला के शहीदों की याद में मजलिसों-मातम का आगाज हो जायेगा। शहीदों का गम दो महीने आठ दिन तक (आठवीं रबीउल अव्वल) लगातार जारी रहेगा। मोहर्रम के नजदीक आते ही अजादार मजलिस-ओ-मातम की तैयारियां पूरी करने में जुटे हैं। इमामबाड़ों को सजाने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब (स.) के नवासे हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत के गम में एक ओर जहां महिलाएं अपनी सुहाग की निशानियों को सवा दो महीने के लिए उतारकर काले कपड़े पहनेंगी, तो वहीं घरों में इमामबाड़ा सजाकर इमाम को अपना मेहमान बनाया जाएगा। घरों में ताजिए रखें जाएंगे, तो वहीं फर्श-ए-अजा बिछाकर कर्बला के 72 शहीदों को आंसुओं का पुरसा पेश किया जाएगा।
अजादारों ने सजे इमामबाड़े
मोहर्रम माह की पूर्व संध्या पर काफी अजादारों ने अपने अजाखाने सजा लिए हैं। अकीदतमंद हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व कर्बला के 71 शहीदों का गम मनाने को बेकरार हैं। इसी के चलते अभी भी अजादार इमामबाड़ों में रंगाई-पुताई के अलावा उसे और बेहतर बनाने का काम जुटे हैं।
ताजियों व जरीह की खरीदारी शुरू
रौजा-ए-काजमैन, मदरसा
सुल्तानिया,कश्मीरी मोहल्ला, बजाजा, हुसैनाबाद और मुफ्तीगंज समेत अन्य जगहों पर शनिवार शाम से ताजियों का हदिया शुरु हो गया। छोटे ताजिया की कीमत 20 रुपये से पांच-छह हजार तक है। मोहर्रम की आमद से पहले शनिवार तीसरे पहर के बाद, खासकर पुराने इलाकों में गमी तारी हो गई है। अकीदतमंदों ने काले लिबास निकाल लिए। अय्यामे अजा के इस्तख्बाल में मजलिस व मातम का दौर शुरु हो गया है।