कानपुर-जच्चा बच्चा हैलेट कानपुर में डॉक्टरों की कुशल टीम ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है 70 वर्षीय रजोनिवृत्त महिला, जिनके गर्भाशय में कई विशाल फाइब्रॉइड्स (गाठें) पाई गईं, इस जटिल प्रक्रिया में महिला के गर्भाशय, विभिन्न प्रकार की रसौली (फाइब्रॉएड), दोनों फैलोपियन ट्यूब्स और अंडाशयों को शल्यक्रिया द्वारा सुरक्षित रूप से हटाया गया वह भी बिना किसी रक्तदान या रक्त चढ़ाने की आवश्यकता के महिला को लंबे समय से पेट में भारीपन, सूजन और बेचैनी की शिकायत थी रजोनिवृत्त होने के बावजूद, जांच में गर्भाशय में कई बड़े फाइब्रॉइड्स पाए गए जिनका कुल आकार करीब 27x 18 सेंटीमीटर से अधिक था।उम्र, हार्मोनल परिवर्तनों और रोग की जटिलता को देखते हुए यह एक अत्यंत जटिल केस था समय रहते किए गए सटीक निदान और टीम द्वारा किए गए पूर्व नियोजन के चलते महिला को तुरंत सर्जरी के लिए तैयार किया गया बिना किसी रक्त प्रबंध के, विशेषज्ञ सर्जन की अगुवाई में ऑपरेशन सफलता पूर्वक पूरा किया गया वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. वन्दना शर्मा ने बताया, “यह केस अत्यधिक चुनौतीपूर्ण था इस उम्र में और रजोनिवृत्ति के पश्चात इतने बड़े फाइब्रॉयडस असामान्य हैं हमारी टीम डॉ वन्दना शर्मा, डॉ मीनाक्षी, डॉक्टर शेफाली, दो अनीषा, डॉ शिवानी, दो प्रेरणा, डॉक्टर श्वेता, डॉक्टर मुस्कान, डॉक्टर प्रियंका, डॉक्टर ममता ने समय पर निदान किया और पूर्ण तैयारी के साथ ऑपरेशन को इतनी कुशलता से अंजाम दिया कि रोगी को रक्त चढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ी यह एक उदाहरण है कि कैसे सही समय पर किया गया निर्णय जीवनरक्षक सिद्ध हो सकता है ”वर्तमान में रोगी की हालत स्थिर है और वह तेजी से स्वस्थ हो रही हैं अस्पताल प्रबंधन ने इस सफलता को चिकित्सा सेवा में एक मील का पत्थर बताया यह उपलब्धि न केवल सर्जिकल दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि समय पर निदान, कुशल योजना और अनुभवी चिकित्सकों की टीम किसी भी जटिल स्थिति को सफलता में बदल सकती है यह केस अन्य चिकित्सकों और संस्थानों के लिए भी प्रेरणास्पद है।
बिना रक्त चढ़ाए ही किया गया यूटेरस और अंडाशयों का निष्कासन