कानपुर, ब्राह्मण जागरूकता समिति के तत्वावधान में आज केशव पुरम में महर्षि सूरदास की जयंती मनाई गई और उनके चित्र पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए गए समिति के अध्यक्ष अभय दुबे ने बताया कि सूरदास एक सारस्वत ब्राह्मण थे. उन्हें अक्सर भक्तिकाल की कृष्णभक्ति शाखा के प्रमुख कवि के रूप में जाना जाता है. उनके पिता का नाम रामदास सारस्वत ब्राह्मण था. सूरदास का जन्म 1478 ई. के आसपास मथुरा-आगरा मार्ग पर स्थित ‘रुनकता’ नामक गाँव में हुआ था. कुछ लोगों का कहना है कि उनका जन्म ‘सीही’ नामक गाँव में हुआ था! सूरदास वल्लभाचार्य के शिष्य थे और वे मथुरा के गऊघाट पर श्रीनाथ के मंदिर में रहते थे. सूरदास ने मुख्य रूप से तीन ग्रंथों की रचना की थी! सूरसागर, सूरसारावली, और साहित्य-लहरी।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से अभय दुबे ,राकेश शुक्ला ,राकेश तिवारी, नवनीत शुक्ला ,आशीष त्रिपाठी, समन्वय बाजपेई ,महर्षि मिश्रा, विनय शर्मा, आदर्श मिश्रा, हरिओम तिवारी ,इत्यादि लोग रहे!
केशव पुरम में महर्षि सूरदास की जयंती मनाई गई