डोनर बनने से पहले जानें पूरी प्रक्रिया, गलतफहमियों के कारण पीछे हट रहे लोग
कानपुर। ब्लड से जुड़ी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट नई जिंदगी की उम्मीद बन सकता है। कई मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें इलाज के दौरान बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है, लेकिन उनके परिवार में उपयुक्त डोनर नहीं मिल पाता। ऐसे में किसी अनजान व्यक्ति का डोनर बनना मरीज के लिए जीवन बचाने वाला कदम साबित हो सकता है। हालांकि, बोन मैरो डोनेशन को लेकर समाज में आज भी कई तरह की गलतफहमियां मौजूद हैं। कुछ लोग इसे बेहद दर्दनाक प्रक्रिया मानते हैं, तो कुछ को डर रहता है कि बोन मैरो डोनेट करने से उनकी हड्डियां कमजोर हो जाएंगी या शरीर को लंबे समय तक नुकसान पहुंचेगा। इन्हीं आशंकाओं के कारण कई लोग डोनर बनने से पीछे हट जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही जानकारी के अभाव में पैदा होने वाले डर को दूर करना जरूरी है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपयुक्त डोनर मिल सके। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के हीमैटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. (ब्रिगेडियर) सत्यरंजन दास ने बताया कि बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए सही डोनर की तलाश आज भी चिकित्सा जगत के सामने एक बड़ी चुनौती है। ब्लड से जुड़ी गंभीर बीमारियों से पीड़ित अनेक मरीजों को अपने परिवार में ऐसा व्यक्ति नहीं मिल पाता, जिसकी टिश्यू मैचिंग ट्रांसप्लांट के लिए उपयुक्त हो। ऐसे मरीजों के लिए आम लोगों के बीच मौजूद डोनर रजिस्ट्री महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि रजिस्ट्री में शामिल किसी व्यक्ति का टिश्यू मैच किसी मरीज से हो जाता है और चिकित्सकीय जांच के बाद वह डोनेशन के लिए उपयुक्त पाया जाता है, तो उसके स्टेम सेल या बोन मैरो का इस्तेमाल मरीज के उपचार में किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि बोन मैरो डोनर बनने की प्रक्रिया को लेकर सबसे पहले लोगों को यह समझना चाहिए कि डोनर रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराने और वास्तव में बोन मैरो डोनेट करने में अंतर होता है। रजिस्ट्री में शामिल होने के लिए आमतौर पर गाल के अंदर से एक साधारण स्वैब सैंपल लिया जाता है। इस नमूने के माध्यम से टिश्यू टाइपिंग की जाती है, जिससे भविष्य में किसी मरीज के साथ संभावित मैच की पहचान की जा सके। इसके लिए शुरुआत में किसी बड़ी सर्जरी या बोन मैरो निकालने की जरूरत नहीं होती। रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराने का अर्थ यह भी नहीं है कि व्यक्ति को तुरंत डोनेशन करना पड़ेगा। डोनेशन की जरूरत तभी सामने आती है, जब किसी मरीज के साथ उसका उपयुक्त मैच मिले और आगे की चिकित्सकीय जांच में वह डोनर के रूप में योग्य पाया जाए।
डॉ. सत्यरंजन दास के मुताबिक, बोन मैरो डोनेशन को लेकर एक बड़ी गलतफहमी यह है कि इसमें हर बार हड्डी के भीतर से बोन मैरो निकाला जाता है। जबकि वास्तविकता यह है कि डोनेशन के अलग-अलग तरीके होते हैं और मरीज की जरूरत, ट्रांसप्लांट की योजना तथा चिकित्सकीय परिस्थितियों के आधार पर उपयुक्त तरीका चुना जाता है। कई मामलों में रक्तप्रवाह से स्टेम सेल एकत्र किए जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में पेल्विक बोन यानी श्रोणि की हड्डी से बोन मैरो लिया जाता है। दोनों प्रक्रियाओं का उद्देश्य मरीज को ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी स्वस्थ रक्त बनाने वाली कोशिकाएं उपलब्ध कराना होता है।
रक्तप्रवाह से भी एकत्र किए जाते हैं स्टेम सेल
बोन मैरो डोनेशन की प्रक्रिया को लेकर जानकारी देते हुए विशेषज्ञ ने बताया कि स्टेम सेल एकत्र करने का एक तरीका रक्तप्रवाह से कोशिकाएं लेना है। इस प्रक्रिया में डोनर को चिकित्सकीय निगरानी में ऐसी दवा दी जाती है, जिससे बोन मैरो में मौजूद रक्त बनाने वाली स्टेम सेल रक्तप्रवाह में अधिक संख्या में आ सकें। इसके बाद विशेष मशीन की मदद से रक्त से स्टेम सेल अलग किए जाते हैं और शेष रक्त डोनर के शरीर में वापस पहुंचा दिया जाता है। यह प्रक्रिया सामान्य रक्तदान से अलग होती है, क्योंकि इसमें विशेष रूप से रक्त बनाने वाली स्टेम सेल एकत्र की जाती हैं।
इस प्रक्रिया के दौरान डोनर को कुछ समय तक हड्डियों या मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, थकान अथवा अन्य हल्की परेशानियां हो सकती हैं। इन प्रभावों की प्रकृति और अवधि व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए डोनर को प्रक्रिया से पहले संभावित दुष्प्रभावों की जानकारी दी जाती है और पूरी प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकीय निगरानी रखी जाती है। डोनेशन के बाद भी स्वास्थ्य की स्थिति पर ध्यान दिया जाता है, ताकि किसी प्रकार की परेशानी होने पर समय रहते आवश्यक उपचार दिया जा सके।
पेल्विक बोन से बोन मैरो लेने की प्रक्रिया भी सुरक्षित निगरानी में
कुछ मरीजों की जरूरत के अनुसार डोनर की पेल्विक बोन से सीधे बोन मैरो लिया जाता है। यह प्रक्रिया अस्पताल में की जाती है और इसके लिए डोनर को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है। एनेस्थीसिया के प्रभाव में डोनर गहरी नींद में रहता है और प्रक्रिया के दौरान दर्द महसूस नहीं करता। चिकित्सक विशेष सुई की सहायता से पेल्विक बोन से बोन मैरो एकत्र करते हैं। इसमें रीढ़ की हड्डी से बोन मैरो निकालना जरूरी नहीं होता, जैसा कि कई लोगों के मन में गलत धारणा बनी रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रक्रिया के बाद डोनर को कमर के निचले हिस्से में दर्द, हल्की अकड़न या थकान महसूस हो सकती है। यह परेशानी कई बार कड़ी शारीरिक गतिविधि के बाद होने वाले दर्द जैसी लग सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति की रिकवरी एक जैसी नहीं होती। डोनर की उम्र, स्वास्थ्य की स्थिति, डोनेशन की मात्रा और अपनाई गई प्रक्रिया के अनुसार आराम करने का समय अलग-अलग हो सकता है। चिकित्सक डोनर की स्थिति का आकलन करने के बाद उसे सामान्य गतिविधियां शुरू करने के बारे में सलाह देते हैं।
क्या बोन मैरो डोनेट करने से शरीर कमजोर हो जाता है?
बोन मैरो डोनेशन को लेकर एक आम आशंका यह भी है कि इससे शरीर में रक्त बनाने की क्षमता कम हो जाती है या व्यक्ति लंबे समय तक कमजोर बना रहता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में रक्त बनाने वाली स्टेम सेल और बोन मैरो की भरपाई करने की प्राकृतिक क्षमता होती है। डोनेशन के बाद शरीर एकत्र की गई कोशिकाओं की दोबारा भरपाई करने लगता है। हालांकि, रिकवरी की अवधि डोनेशन के प्रकार और डोनर की व्यक्तिगत शारीरिक स्थिति पर निर्भर करती है।
डोनेशन के बाद कुछ समय तक थकान, दर्द या असहजता महसूस होना संभव है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक डोनर को लंबे समय तक कमजोरी का सामना करना पड़ेगा। अधिकांश डोनर उचित देखभाल और चिकित्सकीय सलाह के साथ धीरे-धीरे अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं। किसी भी तरह की शारीरिक परेशानी को नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है। डोनेशन से पहले स्वास्थ्य की जांच और उपयुक्तता का मूल्यांकन इसी उद्देश्य से किया जाता है, ताकि डोनर के लिए जोखिम को कम किया जा सके।
डोनर की सुरक्षा को दिया जाता है महत्व
डॉ. सत्यरंजन दास ने बताया कि बोन मैरो डोनेशन के दौरान मरीज के उपचार के साथ डोनर की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण होती है। इसलिए डोनेशन से पहले डोनर की चिकित्सकीय जांच की जाती है। इसमें उसकी स्वास्थ्य संबंधी स्थिति, पहले से मौजूद बीमारियों, दवाओं और अन्य जरूरी पहलुओं का मूल्यांकन किया जाता है। जांच के बाद ही यह तय किया जाता है कि संबंधित व्यक्ति डोनेशन के लिए उपयुक्त है या नहीं और उसके लिए कौन-सी प्रक्रिया उचित होगी।
उन्होंने बताया कि डोनर को प्रक्रिया के बारे में पूरी जानकारी देना भी आवश्यक है। इसमें डोनेशन के तरीके, संभावित असुविधाओं, जोखिमों, रिकवरी और बाद में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया जाता है। इससे डोनर अपनी इच्छा और समझ के आधार पर निर्णय ले सकता है। किसी भी व्यक्ति को डोनेशन के लिए आगे आने से पहले चिकित्सकीय टीम से सभी जरूरी सवाल पूछने चाहिए, ताकि उसके मन में मौजूद आशंकाओं का समाधान हो सके।
क्यों जरूरी है डोनर रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराना?
बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत कई गंभीर रक्त संबंधी बीमारियों में पड़ सकती है। ऐसे मरीजों के लिए उपयुक्त डोनर मिलना उपचार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होता है। परिवार के सदस्यों में टिश्यू मैच न मिलने की स्थिति में मरीज को असंबंधित डोनर की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में डोनर रजिस्ट्री में अधिक लोगों का शामिल होना मरीजों के लिए उपयुक्त मैच मिलने की संभावना बढ़ा सकता है।
हालांकि, केवल रजिस्ट्री में नाम दर्ज होना पर्याप्त नहीं है। टिश्यू मैचिंग, डोनर की चिकित्सकीय उपयुक्तता और मरीज की उपचार संबंधी जरूरतों का आकलन भी जरूरी होता है। इसके बावजूद, रजिस्ट्री में शामिल होने का शुरुआती कदम भविष्य में किसी जरूरतमंद मरीज के लिए उम्मीद का कारण बन सकता है। इसीलिए विशेषज्ञ लोगों को बोन मैरो डोनेशन के बारे में विश्वसनीय जानकारी प्राप्त करने और पंजीकरण की प्रक्रिया समझने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
गलतफहमियों को दूर करना जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि बोन मैरो डोनेशन को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। दर्द, कमजोरी और शरीर पर लंबे समय तक पड़ने वाले प्रभावों को लेकर फैली आशंकाओं के कारण लोग इस विषय पर जानकारी लेने से भी बचते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि डोनेशन के तरीके, संभावित दुष्प्रभाव और रिकवरी की अवधि अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले चिकित्सकीय विशेषज्ञों से सही जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है। डोनर बनने का निर्णय व्यक्तिगत होता है और इसके लिए पूरी जानकारी, सहमति तथा चिकित्सकीय जांच जरूरी है। यदि अधिक लोग बोन मैरो डोनेशन की प्रक्रिया को समझें और अपनी इच्छा से डोनर रजिस्ट्री में शामिल हों, तो उन मरीजों की मदद की संभावना बढ़ सकती है जिन्हें अपने परिवार में उपयुक्त डोनर नहीं मिल पाता। एक उपयुक्त डोनर किसी जरूरतमंद मरीज के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है।