कानपुर। पुलिस आयुक्त कार्यालय सभागार में मंगलवार को पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल की अध्यक्षता में जून माह की मासिक अपराध समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में शहर की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं, साइबर अपराध, गैंगस्टर अधिनियम के मामलों, न्यायालय से संबंधित प्रकरणों, महिला सुरक्षा तथा विभिन्न विभागों के साथ समन्वय की विस्तृत समीक्षा की गई। पुलिस आयुक्त ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि अपराध नियंत्रण और जनसुरक्षा से जुड़े प्रत्येक बिंदु पर शत-प्रतिशत गंभीरता के साथ कार्य किया जाए तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में अपर पुलिस आयुक्त (मुख्यालय/अपराध) संकल्प शर्मा, समस्त पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त, सभी थाना प्रभारी, संयुक्त निदेशक अभियोजन, क्षेत्रीय परिवहन विभाग, आबकारी विभाग तथा अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी विभागों ने अपने-अपने कार्यों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर पुलिस आयुक्त ने विस्तार से समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए।
पुलिस आयुक्त ने यक्ष ऐप के प्रभावी संचालन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सभी थानों में अपराधियों का सत्यापन, डोजियर तैयार करने, बीट सूचना का समयबद्ध अंकन तथा संदिग्ध व्यक्तियों का नियमित सत्यापन सुनिश्चित किया जाए। जिन थानों में बीट संबंधी सूचनाओं की प्रविष्टि अपेक्षाकृत कम पाई गई, उनमें रेउना, हरवंशमोहाल, नजीराबाद, रायपुरवा सहित अन्य थानों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यक्ष ऐप की निगरानी स्वयं पुलिस महानिदेशक स्तर से की जा रही है, इसलिए किसी भी प्रकार की लापरवाही संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगी।
गैंगस्टर अधिनियम के अंतर्गत दर्ज मुकदमों की समीक्षा करते हुए पुलिस आयुक्त ने निर्देशित किया कि सभी विवेचनाएं नियमानुसार छह माह के भीतर पूरी कर आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किए जाएं। विशेष परिस्थितियों को छोड़कर किसी भी प्रकरण में एक वर्ष से अधिक की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने विवेचना अधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में जेल प्रशासन की ओर से बताया गया कि वर्तमान में जेल में 14 संवेदनशील बंदियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। न्यायालय में सुरक्षित पेशी के लिए पुलिस लाइन से पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराया जा रहा है तथा सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ है। इस पर पुलिस आयुक्त ने आवश्यक सहयोग जारी रखने के निर्देश दिए।
अग्निशमन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि शहर के विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, संस्थानों और सार्वजनिक भवनों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है। साथ ही तीन दिवसीय अग्नि सुरक्षा अभियान चलाकर लोगों को आग से बचाव, आपदा प्रबंधन और प्राथमिक सुरक्षा उपायों का प्रशिक्षण भी दिया गया। पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिए कि जिन संस्थानों में अग्नि सुरक्षा संबंधी कमियां मिलें, उन्हें पहले नोटिस देकर सुधार का अवसर दिया जाए और निर्धारित समय के भीतर सुधार न होने पर नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
अपराध समीक्षा के दौरान पुलिस आयुक्त ने शस्त्र अधिनियम तथा एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत अपेक्षाकृत धीमी कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त किया। विशेष रूप से बाबूपुरवा, साढ़, चमनगंज, किदवई नगर सहित संबंधित थाना प्रभारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मादक पदार्थों की बिक्री, तस्करी तथा अवैध हथियारों के खिलाफ लगातार विशेष अभियान चलाकर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग एवं शासन स्तर पर लंबित जांचों की समीक्षा करते हुए पुलिस आयुक्त ने सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से ऐसे मामलों की समीक्षा करें और किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न होने दें।
बैठक में यह भी सामने आया कि कई थानों पर उच्च न्यायालय से संबंधित लंबित प्रतिशपथ पत्रों की संख्या अधिक है। इस पर पुलिस आयुक्त ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रतिशपथ पत्र प्राथमिकता के आधार पर समय से दाखिल किए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
विवेचनाओं की समीक्षा के दौरान अनावरण हेतु लंबित मुकदमों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बिठूर, बिल्हौर, अरौल, साढ़ एवं चौबेपुर सहित अन्य संबंधित थानों को लंबित घटनाओं का शीघ्र खुलासा कर विधिक कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि गंभीर अपराधों के खुलासे में किसी भी प्रकार की देरी जनता के विश्वास को प्रभावित करती है।
साइबर अपराधों की समीक्षा करते हुए पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक पात्र मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए तथा साइबर ठगी के मामलों में बैंक खातों को समय रहते फ्रीज कराया जाए, ताकि पीड़ितों की धनराशि शीघ्र वापस कराई जा सके। उन्होंने साइबर सेल और थाना पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया।
पुलिस आयुक्त ने सभी पुलिस उपायुक्त, अपर पुलिस उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त एवं थाना प्रभारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों के पैरोकारों के साथ नियमित बैठक करें। न्यायालय से जमानत पर छूटने वाले अपराधियों तथा उनके जमानतदारों का पूरा विवरण संकलित कर उन पर आवश्यक निगरानी रखी जाए, ताकि पुनः अपराध की संभावना को रोका जा सके।
आगामी शैक्षणिक सत्र को देखते हुए छात्राओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए गए। पुलिस आयुक्त ने कहा कि स्कूल एवं कॉलेज खुलने के बाद एंटी रोमियो टीमों की सक्रियता बढ़ाई जाए, संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्त की जाए तथा छेड़छाड़, उत्पीड़न और अन्य असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए।
बैठक में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर हुड़दंग करने की शिकायतों का भी उल्लेख हुआ। पुलिस आयुक्त ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया कि शराब की दुकानें केवल निर्धारित समय तक ही संचालित हों। यदि कहीं भी अवैध रूप से शराब बिक्री या सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीकर उपद्रव करने की शिकायत मिलती है तो संबंधित थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक के अंत में पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा कि सभी थानों पर उपलब्ध जनशक्ति एवं संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाए। प्रत्येक अधिकारी एवं कर्मचारी को स्पष्ट कार्य आवंटित कर उसकी नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि कोई भी पुलिसकर्मी किसी अवैध गतिविधि में संलिप्त न पाया जाए तथा चौकी प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर वरिष्ठ अधिकारी प्रभावी निगरानी रखें।
उन्होंने जनशिकायतों के निष्पक्ष, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध निस्तारण पर विशेष बल देते हुए कहा कि आमजन के साथ प्रत्येक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी का व्यवहार संवेदनशील, शालीन और सौहार्दपूर्ण होना चाहिए। पुलिस की छवि जनता के बीच उसके व्यवहार से बनती है, इसलिए सेवा, सुरक्षा और विश्वास की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पुलिस आयुक्त ने बड़े धार्मिक आयोजनों, मेलों, त्योहारों एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े संवेदनशील अवसरों पर आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों और संवेदनशील स्थानों की प्रभावी निगरानी की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके और शहर में शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
जून माह की अपराध समीक्षा बैठक संपन्न